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हिंदी उर्वरा है, इसमें भाव प्रवणता है तथा व्याकरण से अनुशासित है : डा.श्वेता दीप्ति

 

सर्वग्राह्य हिन्दी भाषा को संवैधानिक दर्जा प्राप्त हो

आज हिन्दी २२ देशों में करीब १०० करोड़ से भी ज्यादा लोग बोल रहे हैं ।

 

 

डा.श्वेता दीप्ति,१० जनवरी, २०१९, सम्पादकीय | सर्वग्राह्य हिन्दी भाषा को संवैधानिक दर्जा प्राप्त हो हिन्दी एक सर्वगुण सम्पन्न तथा वैज्ञानिक भाषा है । वह भाषा जो स्वयं में विश्वास और प्रेम को समाहित किए हुए है । हिन्दी एक सशक्त एवं समर्थ भाषा के साथ ही, संपर्क की,व्यापार की, शिक्षा व संस्कृति की,मीडिया की, फिल्म की, साहित्य सृजन की तथा निर्देशों की भाषा तो है ही, कलात्मक अभिव्यक्ति की भाषा भी है । अर्थात् वैश्वीकरण के इस दौर में हिन्दी का समृद्ध स्वरूप विश्व स्तर पर आच्छादित हो रहा है । हिन्दी न सिर्फ गतिशील हुई है,अपितु इसने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहुँच को साबित कर दिखाया है । आज हिन्दी के प्रति जागरुकता बढ़ी है और इसका रोज ही विस्तार हो रहा है ।

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हिन्दी एक अद्भुत भाषा है । इसे अद्भुत बताने वाली इसकी अनेकानेक विशेषताएँ हैं । हिंदी उर्वरा है, इसमें भाव प्रवणता है तथा व्याकरण से अनुशासित भी है । यह वह भाषा है,जिसमें गद्य एवं पद्य दोनों का प्रवाह देखते ही बनता है, जो कि एक जीवंत भाषा का लक्षण है । हिन्दी वह भाषा है जिसने समन्वयवाद के स्वरूप को दिल से अपना कर अपने अस्तित्व को निखारा है । इसलिए यह सर्वग्राह्य हो गयी है । किसी भी अन्य भाषा के शब्दों को स्वीकार करने से यह पीछे नहीं हटी है और इसलिए इसका रूप निखरता ही रहा है । साहित्य ही नहीं पठन–पाठन, व्यापार, मीडिया, विज्ञापन आदि क्षेत्रों में भी हिन्दी की पकड़ मजबूत हुई है । सूचना एवं संप्रेषण का सशक्त माध्यम बन चुकी है । विदेशों में न सिर्फ हिन्दी जानने वालों की संख्या बढ़ रही है,अपितु इसके बोलने वालों की भी संख्या बढ़ रही है ।

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इतना ही नहीं फिजी,मॉरीशस,गुयाना,सूरीनाम जैसे दूसरे देशों की अधिकतर जनता हिन्दी बोलती है । विदेशी विश्वविद्यालयों में खुल रहे हिन्दी संकायों से यह साबित होता है कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हिन्दी की स्वीकार्यता में वृद्धि हुई है । खास बात यह है कि जिन विश्वविद्यालयों में हिन्दी विभाग खुल रहे हैं,उनमें पढ़ाने वाले शिक्षक बाहर के नहीं,अपितु स्थानीय ही हैं । विभिन्न कारणों से विदेशी नागरिक हिन्दी की ओर उन्मुख हैं । चीन,जापान,अमेरिका,फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देशों में हिन्दी सीखने वालों का प्रतिशत बढ़ा है । हिन्दी वैश्विक स्वीकृति की ओर अग्रसर है । हिन्दी की सबसे बड़ी सफलता और क्या होगी कि अंग्रेजी के विश्वस्तरीय शब्द कोषों मंी चटनी,इडली, छोला–भटूरा और डोसा जैसे शब्द स्थान पा चुके हैं । अब तो कंप्यूटर की भाषा भी हिन्दी बन गई है ।

    हिन्दी का वैश्वीकरण व्यापक रूप

वैश्वीकरण के इस युग में विश्व बाजार को मानकीकरण भी चाहिए और ग्राहकीकरण भी । अर्थात् पूरी दुनिया के लोग एक मानक भाषा बोलने और एक सी संस्कृति अपनाने को बाध्य होंगे । अमरीकी सूचना सेवा की पत्रिका स्पैन के एक महत्वपूर्ण आलेख में विश्वभर की तकरीबन ६००० भाषाओं के विलुप्त होने की आशंका जतायी गयी है । लेकिन हिन्दी ने वैश्वीकरण के उपरोक्त चुनौतियों को मुँहतोड़ जवाब दिया । आज हिन्दी २२ देशों में करीब १०० करोड़ से भी ज्यादा लोग बोल रहे हैं । अर्थात हिन्दी का वैश्वीकरण व्यापक रूप में हुआ है ।

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इस उम्मीद के साथ कि नेपाल में भी हिन्दी को संवैधानिक दर्जा हासिल हो आप सुधीजन को विश्व हिन्दी दिवस की अशेष शुभकामनाएँ ।

 

 

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