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हिंदी एवं संस्कृत अकादमी के सचिव डॉ. जीतराम भट्ट से हिमालिनी दिल्ली ब्यूरो प्रमुख एस.एस. डोगरा की बातचीत

 

हिंदी अकादमी की हिंदी भाषा-साहित्य प्रचार-प्रसार में अग्रणी डॉ. जीत राम भट्ट
दिल्ली सरकार द्वारा संचालित हिंदी एवं संस्कृत अकादमी के सचिव डॉ. जीत राम भट्ट से
हिमालिनी दिल्ली ब्यूरो प्रमुख एस.एस. डोगरा की मुलाकात के दौरान बातचीत के प्रमुख अंश:

Dr. Jeet Ram Bhatt

प्र.हिंदी अकादमी हिंदी भाषा विकास के लिए क्या-क्या कार्य कर रहा है?
उ. हिंदी अकादमी-हिंदी भाषा-साहित्य के प्रचार-प्रसार करने के लिए अपनी विभिन्न गतिविधियों
के जरिए निरंतर प्रयासरत है. हमारी अकादमी द्वारा इन्द्रप्रस्थ भारती मासिक पत्रिका प्रकाशन,
संवाद, साहित्यकारों की संगोष्ठी, कवि सम्मेलन, नाट्य समारोह, बाल-रंगमंच, कवि गोष्ठियां,
साहित्य उत्सव आदि कार्यक्रम आयोजन से हिंदी भाषा को बल मिलता है. हम हिंदी भाषा प्रचार
करने के लिए हमारे दिल्ली में 13 जगह प्रसार केंद्र स्थापित हैं.
प्र. हिंदी को आज टेकनोलोजी से जोड़ने में हिंदी अकादमी का विशेष योगदान बताएं
उ. हिंदी में कंप्यूटर पर कैसे काम हो सकता है टाइपिंग कैसे हो सकती है हिंदी की शॉर्टहैंड कैसे
सिखाई जा सकती है. इन तमाम विषयों में हिंदी अकादमी उल्लेखनीय योगदान दे रही है.
प्र. इन्टरनेट के युग में, प्रिंट मीडिया-विशेषकर-किताबों की वर्तमान स्थिति पर आपका क्या
कहना है?
उ. हिंदी की पुस्तके, डोगरा साहब आप देखिए पाठकों की समस्या है लिखा जा रहा है छपा भी
जा रहा है और बहुत साहित्यकार भी हैं किन्तु पाठक और श्रोता जो मिलने चाहिए वो नहीं हैं
क्योंकि जो तकनीक का असर हो गया है वैश्विकरण का वो आज की पीढ़ी के साथ-साथ पुरानी
पीढ़ी पर भी है ये सभी , कहीं न कहीं किताबों से थोडा बहुत कटने लगे हैं. क्योंकि नेट पर
गूगल पर सर्च करने की सुविधा हो गई है ऐसे-ऐसे ऐप आ गए हैं संसाधन आ गए हैं कि
व्यक्ति पुस्तकालय में जाने का कष्ट नहीं उठाना चाहता है और न ही पुस्तकें रखना चाहता है.
तो ऐसे समय में साहित्य और भाषा को सही रूप से जानने-समझने के लिए संकट पैदा हो गया
है.
प्र. हिंदी को जन-जन तक पहुँचाने के लिए हिंदी अकादमी के विशेष प्रयासों पर प्रकाश डालिए?

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उ. हमारे सीरियल हो चाहे, हमारी फ़िल्में हो और चाहे अख़बार हो ये सब जो हैं इनमें
साहित्यिक हिंदी या शुद्द हिंदी का प्रयोग नहीं हो रहा है. इसीलिए हिंदी अकादमी ने पाठकों के
संख्या बढ़ाने की कोशिश की है. इसके लिए आम जनता में पाठक तैयार करने लिए प्रव्रती
जागृत करने एवं साहित्यिक रूचि फिर से पैदा करने के लिए हिंदी अकादमी ने एक अभियान
चलाया है. हम लोग साहित्यक गोष्ठी करते रहते हैं और वो भी आम जनता के बीच में. सुदूर
क्षेत्र, दिल्ली केंद्र से लेकर बुराड़ी, किराड़ी, जहाँगीर पुरी, नरेला एवं पालम आदि स्थानों में
साहित्यिक संगोष्ठी या कोई साहित्यिक संध्या या कोई काव्य गोष्ठी, इस तरह आयोजित करते
हैं कि आम जनता समझे की साहित्य भी कुछ है. और मनोरंजन की बात है, मनोरंजन की भी
परिभाषा है मन का रंजन होना. आज की पीड़ी को अपना जन्मदिन मनाना है या कोई उत्सव
मनाना है तो आजकल परम्परा है कि उसमें फ़िल्मी गाने चलें और उस पर डांस किया जाए.
लेकिन इसी दिशा में हिंदी अकादमी प्रयास कर रही है कि इस तरह के भी जो उत्सव हैं उनमें
क्यों न साहित्यिक गतिविधियाँ-जन्मदिन में काव्य गोष्ठी या हास्य कवि सम्मेलन आयोजित
हो सकता है या कहानी पाठ आयोजित हो सकता है. और इस तरह आयोजन करने से क्या होगा
कि डैक-डांस में तो क्या है केवल एक ही पीढ़ी शामिल होती है जबकि साहित्यिक गतिविधियों में
दादाजी, पिताजी, स्वयं एवं छोटे आयु वाले भी सम्मिलित हो सकते हैं.

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