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इस बार हरियाली अमावस्या गुरुवार, 28 जुलाई को बन रहा गुरु पुष्य का शुभ योग

 

श्रावण मास प्रकृति के शृंगार का महीना है। इस माह में चारों ओर हरियाली का साम्राज्य होता है। इसीलिए श्रावण अमावस्या को हरियाली अमावस्या कहा जाता है। इस बार हरियाली अमावस्या गुरुवार, 28 जुलाई को है। इस बार हरियाली अमावस्या के दिन यानी 28 जुलाई को सुबह 7 बजकर 5 मिनट तक पुनर्वसु नक्षत्र और उसके बाद पुष्य नक्षत्र है, इसलिए इस दिन गुरु पुष्य का शुभ योग भी बन रहा है। पुष्य नक्षत्रों का राजा है, इसलिए गुरु पुष्य योग में पितरों के निमित्त तर्पण अत्यंत पुण्य देने वाला होता है।

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ऐसी मान्यता है कि इस दिन वृक्ष लगाने से पितर प्रसन्न होते हैं और पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। धर्मग्रंथों और ज्योतिष के अनुसार, अगर अच्छा स्वास्थ चाहते हैं, तो नीम का पौधा लगाएं। संतान के लिए केले का पौधा, सुख-शांति-समृद्धि के लिए तुलसी का बिरवा और लक्ष्मी जी की प्राप्ति के लिए आंवले के पौधे लगाना अच्छा माना जाता है। भविष्यपुराण के अनुसार, जिनको संतान नहीं है, उनके लिए वृक्ष ही संतान है। जो वृक्ष लगाते हैं, उनके लौकिक-पारलौकिक कार्य वृक्ष ही करते हैं। हिन्दू धर्म में माना गया है कि वृक्षों में देवी-देवता का निवास होता है। अश्वत्थ (पीपल) में त्रिदेव- ब्रह्मा, विष्णु और शिव रहते हैं। भविष्यपुराण के अनुसार, हर आंवले में भगवान विष्णु का वास होने के कारण इसको लगाने से लक्ष्मी जी की कृपा भी होती है। वटवृक्ष मोक्ष प्रदान करता है। शमी का पेड़ गणेश जी और शिवजी को बहुत प्रिय है। यह सभी रोगों को नष्ट करता है।

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इस दिन सुयोग्य पात्र को दान देने से पितर खुश होते हैं। पितरों के प्रसन्न होने से घर में खुशहाली आती है। चूंकि अमावस्या पितरों की तिथि है, इसलिए हरियाली अमावस्या के दिन मछलियों को आटे की गोलियां खिलाएं। नदी या बहते हुए जल में काले तिल प्रवाहित करें। पितरों का ध्यान कर किसी पात्र में जल लेकर उसमें काले तिल, चीनी, चावल और फूल डालें और पीपल के पेड़ को अर्पित करें। ‘ऊं पितृभ्य: नम:’ मंत्र का जाप करें।

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