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व्यवसायियों के ऊपर विष वमन मारवाड़ी समुदाय निशाने पर ! लिलानाथ गौतम

 

लिलानाथ गौतम, हिमालिनी अंक ऑक्टोबर । हाल ही में एक टेलिविजन में व्यवसायी तथा उद्योगपति पवन गोल्यान और दुर्गा प्रसाई की संयुक्त अन्तरवार्ता ली गई । प्रस्तुत अन्तरवार्ता आज व्यवसायिक तथा राजनीतिक वृत्त में चर्चा का विषय है । पत्रकार ऋषि धमला के साथ गोल्यान और प्रसाई की संयुक्त अन्तरवार्ता और उसके बाद विकसित घटनाक्रम एक चिन्ता का विषय भी है । हां, यहाँ एक व्यवसायी दूसरे व्यवसायी के विरुद्ध खड़े हो रहे हैं । विशेषतः मारवाड़ी समुदाय के विरुद्ध विष वमन करने का काम हो रहा है । नेपाल की अर्थ व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान करनेवाले मारवाड़ी समुदाय के विरुद्ध लक्षित कर मेडिकल व्यवसायी दुर्गा प्रसाई ने जो आरोप लगाया है, वह सोचनीय है ।
सिर्फ नेपाल ही नहीं, विश्व के कई देश आर्थिक मंदी से गुजर रहे हैं । ऐसी ही पृष्ठभूमि में राजनीतिक रूप में भी क्रियाशील व्यवसायी दुर्गा प्रसाई का दावा है कि नेपाल की आर्थिक धरातल को कमजोर बनाने का काम यहां के कुछ व्यवसायियों ने किया है । उनके अनुसार नेपाल के दो दर्जन व्यवसायी नेपाल को आर्थिक रूप में ध्वस्त बनाने में लगे हुए हैं । प्रसाई द्वारा व्यक्त शब्द को लेकर कहें तो नेपाल को आर्थिक रूप में कमजोर बनानेवाले अधिक व्यवसायी मारवाड़ी समुदाय के हैं, जो नेपाल को लूटने के लिए भारत से आए हैं । इसतरह के गम्भीर आरोप के साथ प्रसाई ने कहा है कि अब दशहरा, दीपावली और छठ पर्व के बाद ऐसे व्यवसायियों के विरुद्ध देशव्यापी आन्दोलन शुरु की जाएगी । प्रसाई ने स्पष्ट शब्द में कहा है कि उन लोगों को नेपाल से निकाल दिया जाएगा ।

व्यवसायी प्रसाई ने इसतरह के गम्भीर आरोप के साथ एक पत्रकार सम्मेलन भी किया, जहां उन्होंने कुछ उद्योगी व्यवसायियों का नाम लिया है और कहा है– ‘यह लोग चोर हैं ।’ उनके द्वारा आयोजित पत्रकार सम्मेलन में मारवाड़ी समुदाय के ही कुछ व्यवसायी भी सहभागी थे, उन लोगों का भी यही कहना था कि भारत से नेपाल प्रवेश करनेवाले कुछ मारवाड़ी समुदाय के व्यवसायी नेपाल को सिर्फ अर्थोपार्जन के लिए प्रयोग करते हैं और यहां से अर्जित रकम अन्य देशों में ले जाते हैं, नेपाल के प्रति उनका कोई प्रेम नहीं है । अर्थात् प्रसाई के साथ कुछ मारवाड़ी समुदाय के व्यवसायी भी हैं । इस तरह के आरोप में कितनी सच्चाइयां है, यह अध्ययन का विषय है, लेकिन प्रसिद्ध उद्योगपति के रूप में स्थापित व्यवसायियों के ऊपर इसतरह का गम्भीर आरोप लगाना शुभ संकेत नहीं है, क्योंकि प्रसाई द्वारा आरोपित व्यवसायी अगर नेपाल से अपना निवेष निकाल कर देश छोड़ते हैं तो नेपाल आर्थिक दृष्टिकोण से सम्पूर्ण रूप में धारासायी हो जाएगा । प्रसाई के कथन अनुसार क्या सीमित व्यवसायियों के हाथ में देश की सम्पूर्ण अर्थ व्यवस्था है या नहीं ? ऐसी परिस्थिति क्यों सृजित है ? इस प्रश्न को लेकर अलग बहस और अध्ययन हो सकता है ।

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खैर ! पत्रकार सम्मेलन समाप्त होने के बाद जब प्रसाई हाल से बाहर आ गए तो कुछ युवाओं ने उनको घेर लिया और ‘काला रंग’ लगा दिया और वहीं युवा नारे लगाने लगे– ‘दुर्गा प्रसाई चोर हैं ।’ बाद में पता चला कि प्रसाई को काला रंग लगाने वाले नेकपा एमाले की भातृ संगठन युवा संघ के कार्यकर्ता थे । अब यहां एक बात स्मरणीय है, प्रसाई भी कुछ साल पहले तक नेकपा एमाले से ही आबद्ध थे । झापा से चुनाव लड़कर सांसद् भी होना चाहते थे । नेकपा माओवादी, एमाले होते हुए प्रसाई आज के दिन राष्ट्रीय प्रजातन्त्र पार्टी (राप्रपा) के समर्थक बन गए हैं । प्रसाई नेपाल में राजतन्त्र को पुनः वापस करना चाहते हैं । उनका कहना है कि गणतन्त्र और संघीयता के कारण भी देश आर्थिक रूप में धारासायी होता जा रहा है ।

झापा जिला में एक मेडिकल कॉलेज स्थापना संबंधी मुद्दा को लेकर प्रसाई राजनीतिक वृत्त में चर्चा में आए थे, जो डा. गोविन्द केसी द्वारा किए गए आमरण अनसन से भी जुड़ा गया । प्रसाई का कहना था कि प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज बंद करने के लिए ही डा. केसी आमरण अनशन पर बैठे हैं  । नेकपा माओवादी केन्द्र के अध्यक्ष तथा वर्तमान प्रधानमन्त्री पुष्पकमल दाहाल ‘प्रचण्ड’ और नेकपा एमाले के अध्यक्ष तथा पूर्व प्रधानमन्त्री केपीशर्मा ओली के साथ प्रसाई का उठना–बैठना भी चर्चा का विषय है । विभिन्न नेता और व्यवसायियों का नाम लेकर उनके विरुद्ध भ्रष्टाचार आरोप लगा कर भी प्रसाई चर्चा में आ जाते हैं । पिछली बार बैंक तथा वित्तिय क्षेत्र विरुद्ध आन्दोलन घोषणा करने के कारण प्रसाई चर्चा में थे ।

हांं, बैंक, लघुवित्त तथा सहकारी जैसे वित्तीय क्षेत्र के विरुद्ध लड़ने के लिए प्रसाई ने लड़ाकू दस्ता भी निर्माण किया है । वह कहते हैं कि वित्तीय क्षेत्र के कारण ही आज लाखों सर्वसाधारण घरबार विहीन होते जा रहे हैं । इस आरोप के साथ उन्होंने देशभर से लघुवित्त और सहकारी पीडि़त सर्वसाधारणों को आन्दोलन के लिए काठमांडू भी लाया था । बैंक तथा वित्तिय क्षेत्र विरुद्ध प्रसाई द्वारा घोषित आन्दोलन और दस्ता को मध्यनजर करते हुए सरकार को एक सर्कुलर ही जारी करना पड़ा । लड़ाकू दस्ता को मध्यनजर करते हुए गृह मन्त्रालय ने ७७ जिला स्थित प्रशासन को कहा कि बैंक तथा वित्तिय क्षेत्र के कर्मचारियों को सुरक्षा प्रदान किया जाए ।

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वित्तीय क्षेत्र से पीडि़त सर्वसाधारण का ही प्रयोग कर प्रसाई क्यों आन्दोलन करना चाहते हैं ? इसके पीछे एक राज भी है । बैंकिङ क्षेत्र से जुड़े व्यवसायियों की माने तो जनता के नाम में प्रसाई पीडि़त सर्वसाधारण के लिए कम और अपने लिए ज्यादा काम कर रहे हैं । झापा में मेडिकल कॉलेज सञ्चालन के लिए प्रसाई ने विभिन्न बैंकों से जो कर्जा लिया है, वह चुक्ता नहीं कर पा रहे हैं । मेडिकल कॉलेज सञ्चालन ना होने के कारण प्रसाई अरबों का नुकसान झेल रहे हैं । कर्जा चुक्ता करने के लिए बैंकिङ क्षेत्र से उन के ऊपर दबाव है । कहा जाता है कि यही कारण प्रसाई बैंकिङ क्षेत्र से जुड़े हुए व्यवसायियों के विरुद्ध विष वमन कर रहे हैं ।

व्यवसायी प्रसाई ने ही स्वीकार किया है कि आज के दिन उनके ऊपर ५०० करोड़ का कर्जा है । लेकिन उन्होंने यह भी दावा किया है कि उनके पास २००० करोड़ की प्रापर्टी भी है । और प्रसाई कहते हैं कि नेपाल को बचाना है तो मारवाड़ी समुदाय के व्यक्ति से भी नेपाल को बचाना होगा । उन्होंने जिनके ऊपर आरोप लगाया है, उनके ही बैंक से प्रसाई ने कर्जा भी लिया है । सहज अनुमान यह है कि कर्जा से बचने के लिए प्रसाई आज व्यवसायियों के विरुद्ध अनाप–सनाप गाली कर रहे हैं । प्रसाई ने ऐसी कपोलकल्पित आरोप भी लगाया है कि ब्याज वसुली के लिए बैंक सञ्चालकों ने भारत से गुण्डा लाया है । नेपाल के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान करनेवाले व्यवसायियों के विरुद्ध इसतरह का आरोप गम्भीर है और निन्दनीय भी ।

इतना होते हुए भी प्रसाई की ओर से जो विचार अभिव्यक्त हो रहा है, उसमें कुछ सत्यता भी है, कुछ भ्रामक है तो कुछ कपोलकल्पित भी है । लेकिन उनकी वाक–पटुता ऐसी है कि उनके द्वारा व्यक्त विचार पर कई लोग विश्वास करते हैं । इसलिए सामाजिक सञ्जालों में उनके समर्थक लाखों में हैं । विशेषतः बैंक तथा वित्तीय संस्थाओं से कर्जा लेकर चुक्ता न करनेवाले व्यक्ति उनके ‘डाइहर्ट फ्यान’ भी हैं । उसी में से एक व्यक्ति सामाजिक सञ्जाल में कह रहे थे कि अगर प्रसाई शरीर में बम फिटकर कर देते हैं तो वह कहीं भी फटने के लिए तैयार हैं । इसतरह की अभिव्यक्ति अराजक लग सकती है, लेकिन सच्चाई यही है कि प्रसाई के लिए जान देनेवाले व्यक्ति भी तैयार हो रहे हैं । प्रसाई तथा उनके समर्थकों को लग रहा है कि आन्दोलन करने से बैंकिङ कर्जा और ब्याज में राहत मिल सकता है ।

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प्रसाई की माने तो ५५ व्यापारी और १० नेता के हाथ में नेपाल बैंकिङ क्षेत्र है और इसमें से अधिक व्यापारी मारवाड़ी समुदाय के हैं । उन्होंने कहा है कि अगर वे लोग चाहते हैं तो नेपाल को कभी भी आर्थिक रूप में समाप्त कर सकते हैं । अगर प्रसाई की अभिव्यक्ति में सच्चाई है और राज्य की नीति के कारण ही देश की अर्थ व्यवस्था कुछ व्यक्तियों के हाथ में जा रही है तो राज्य को ही सोचना चाहिए । राज्य की पहलकदमी के अलावा इसमें कुछ भी होनेवाला नहीं है । एक व्यक्ति तथा व्यवसायी के कारण समग्र उद्योग व्यवसाय तथा व्यवसायियों पर कीचड़ फेंकने से समस्या का समाधान नहीं हो सकता है ।

प्रसाई द्वारा आरोपित व्यवसायिक घराना
व्यवसायी दुर्गा प्रसाई ने नेपाल के १६ व्यवसायिक घराना पर आरोप लगाया है कि वे लोग नेपाल को आर्थिक रूप में कमजोर बना रहे हैं । उनका मानना है कि वे लोग नेपाल में कमाते हैं और उक्त पैसा विदेश ले जाते हैं और उधर ही खर्च करते हैं । तस्कर, माफिया और चोर का आरोप लगाते हुए प्रसाई ने विशेषतः १९ व्यवसायियों का नाम लिया है । विशाल ग्रुप अन्तर्गत के ८, गोल्यान ग्रुप अन्तर्गत के ५, एनआइसी एशिया बैंक अन्तर्गत ६ व्यवसायियों को उन्होंनें आरोपित किया है । विशाल ग्रुप के जगदीशप्रसाद अग्रवाल, त्रिलोकचन्द्र अग्रवाल, तुलसीराम अग्रवाल, अशोककुमार अग्रवाल, अनुज अग्रवाल, विशाल अग्रवाल, निकुञ्ज अग्रवाल और अर्पित अग्रवाल आरोपित हैं । इसीतरह गोल्यान ग्रुप अन्तर्गत अध्यक्ष पवनकुमार गोल्यान, उपाध्यक्ष वाशुदेव गोल्यान, निर्देशक शक्ति गोल्यान, अनन्त गोल्यान और अक्षय गोल्यान, एनआइसी एशिया बैंक के पुरुषोत्तमलाल संघाई, शुभाषचन्द्र संघाई, विरेन्द्रकुमार संघाई, रामचन्द्र संघाई, गोविन्दलाल संघाई और शैलेस संघाई के ऊपर भी प्रसाई ने गम्भीर आरोप लगाया है । आरोपित व्यवसायियों के ऊपर तस्करी, भू–माफिया, बैंक माफिया, बीमा माफिया, विद्युत चोरी, नेपाल में नकली भारतीय नोटों का कारोबार, हुण्डी कारोबार आदि का आरोप है ।

लिलानाथ गौतम

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