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इंस्पेक्टर मनोज कुमार शर्मा का हुआ ट्रांसफर, “बिहार और नेपाल को किया प्रणाम”

इंस्पेक्टर मनोज कुमार शर्मा का हुआ ट्रांसफर, “बिहार और नेपाल को किया प्रणाम” और लोग हुए मायूस

आज मानव तस्करी रोधी इकाई क्षेत्रक मुख्यालय बेतिया कार्यालय 47वीं वाहिनी एसएसबी रक्सौल बिहार के स्वतन्त्र प्रभारी इंस्पेक्टर मनोज कुमार शर्मा का स्थानतंरण हो गया है।
बिहार और नेपाल मे अपने कार्यों और व्यवहार के लिए अत्यंत प्रिय इंस्पेक्टर शर्मा बिहार और नेपाल के बाद आसाम का दिल जीतने के लिए चल पड़े. विभाग के समस्त व्यक्तियों में पुष्प, माला, शुभकामना पत्रों, उपहारों इतियादी के साथ भरे ह्रदय से विदा किया.
यदि यह देखना हो कि किसी अधिकारी का कार्यकाल कैसा रहा तो उनके लिए लोगों की भावनाएं देखिये, लोगों की उन व्यक्तियों के प्रति जो भावनाएं दिखाई पड़ती हैं वो उनके कार्यों का दर्पण होती हैं. रक्सौल के, बीरगंज के लोगों में तथा हर छोटे बड़े कर्मचारियों/अधिकारियों के मन में उदासी के बादल छाए हुए थे क्योंकि इंस्पेक्टर मनोज कुमार शर्मा जी का स्थांतरण हो गया था अत: आज उन्हें अचानक से असम की ओर कूच करना पड़ गया. अभी, आसपास के क्षेत्रों में लोगों को भी ना पता चला था, जैसे जैसे लोगों को उनके आसाम जाने की जानकारी हो रही है लोग आश्चर्य और भावुक हो रहें हैं.
कल जब उनके सम्मान में बैठक का आयोजन हुआ तब उनके सम्मान में दो शब्द बोलने आये लोगों के गले ही रुंध गए. उनके सम्मान में भोज व्यवस्था भी रखी गयी थी.
रक्सौल में इंस्पेक्टर शर्मा जी कार्यकाल लगभग 4 साल का रहा, जब वो नई दिल्ली में इंटेलिजेंस ब्यूरो से स्थानतंरण हो कर 06 जून 2020 में रक्सौल आये तब उन्हें ई समवाय एसएसबी (हवाईअड्डे) का प्रभार दिया गया और उन्होंने वहाँ से श्रेष्ठ कार्य करते हुए लगभग नब्बे हजार का सीजर दिया जिसमें नशीले पदार्थ की तस्करी, नकली मुद्रा, हथियारतस्करी, वन्यजीव अपराध, प्रतिबंधित सामनों की तस्करी, बड़े अपराधी इतियादी थे.
इसके पश्चात 2021 में जनवरी से जून तक कुछ विभागीय कार्यों तक बाहर रहे फिर पुन: वापस रक्सौल आकर जून 2021 में मानव तस्करी रोधी इकाई क्षेत्रक मुख्यालय एसएसबी कार्यालय 47वीं वाहिनी एसएसबी रक्सौल (बिहार) का स्वतंत्र प्रभार दिया गया.
उनके नेतृत्व और कार्यकाल में सशस्त्र सीमा बल द्वारा मानव तस्करी जैसे अपराध के विरुद्ध ऐसे कार्य हुए जो आज तक गृहमंत्रालय के अधीन किसी व्यक्ति या विभाग ने नहीं किये. गृहमंत्रालय अधीन जितने भी विभाग हैं उन सबके इतिहास में यह पहली बार है कि किसी अधिकारी ने अपने कार्य क्षेत्र के अतिरिक्त अन्य राज्यों यानी उत्तर प्रदेश, बंगाल, गुजरात, राजस्थान, जम्मू, बिहार से सफलतापूर्वक रेस्क्यू ऑपरेशन किए और करवाए जिससे बहुत सारे परिवारों के नाबालिग बच्चों का जीवन बच सका ।
यह पहली बार ही था जब सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) ने ऑर्केस्ट्राओं पर छापा मारा और बहुत सी नाबालिग पीड़ित लड़कियों को ऑर्केस्ट्रा से मुक्त कराया गया। एसएसबी द्वारा पहले मोबाइल लोकेशन ट्रैक से पीड़ितों को रेकस्यू नहीं किया गया किन्तु इंस्पेक्टर शर्मा ने इस प्रकार बहुत से अपराधियों के चुंगल से नाबालिग लड़कियों को बचाया गया। ऐसा लगता है कि एक फिल्म का डाइलॉग उनके लिए ही था “ए सोल्जर नेवर ऑफ ड्यूटी” क्योंकि उन्होंने कई बार छुट्टी में रहते हुय भी रेस्क्यू ओपेरेशन किए। उन्होंने बिहार और नेपाल का मोस्ट वांटेड अपराधी को भी पकड़ा था और भी बड़े अपराधियों को पकड़ा था।
इंस्पेक्टर मनोज कुमार शर्मा का नेतृत्व, उनकी कार्य शैली और कार्यों का ही कमाल था कि उनके प्रति इतना विश्वास उत्पन्न हुआ जिसके कारण बिहार और नेपाल की नागरिकों ही नहीं बल्कि नेपाल पुलिस, नेपाल एनजीओ, नेपाल एवं भारत दूतावास तथा बिहार पुलिस द्वारा बहुत से पीड़ितों को बचाने का अनुरोध और अनुरोध पत्र सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के पास आने लगे ।

मानव तस्करों का मनोबल तोड़ने और पीड़ितों की जान बचाने के लिए भारतीय और नेपाली एजेंसियों के साथ अच्छे बहुत मधुर सम्पर्कबनाएं. अपने कार्यकाल के समय भारतीय एवं गैर सरकारी संगठनों, बाल कल्याण समिति, डीएम की टीमों के साथ बैठकें की गईं ताकि उनके सहयोग से मानव तस्करी को रोकने के लिए उचित कार्रवाईयां की जा सके। इस दौरान मानव तस्करी रोकने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाए गए। नेपाल के साथ भी रिश्तों ने नए आयाम को छुआ.
` उनको बिहार सरकार द्वारा उन्हें पीपुल्स फ्रेंडली, उत्कर्ष्ट सोच, जवाव देह कार्यशैली, अहम फैसले लेने में त्वरित क्षमता सजगता व् व्यवहार कुशलता के चलते उन्हें 2021 में प्रशस्ती पत्र दे कर सम्मानित किया गया. इसके अतिरिक्त उनके कार्यों के लिए उनके विभाग से ही नहीं बल्कि अन्य बहुत सी सरकारी और गैरसरकारी विभागों से उन्हे लगभग 51 बार प्रशस्तिपत्र और ट्रॉफी से सम्मानित किया गया जैसे बिहार सरकार, नेपाल सरकार, उत्तरप्रदेश सरकार, भारतीय दूतावास, नेपाल दूतावास और विभिन्न एनजीओ इतियादी सम्मिलित थे ।
इनके नेतृत्व का ही जादू था कि देश की ही नहीं बल्कि एसएसबी का और स्वयं इंस्पेक्टर मनोज कुमार शर्मा की भारत के मीडिया मे ही नहीं बल्कि अंतर्राष्ट्रीय मीडिया यानी यूरोपीय देश और नेपाली मीडिया में भी बहुत प्रशंसा हुई ।
छोटे बड़े कर्मचारी हो अधिकारी हो इंस्पेक्टर मनोज कुमार शर्मा जी ने हर किसी की समस्या को अपनी समस्या समझ कर उसे निपटाया. हर किसी को ऐसा लग रहा था कि वो किसी अधिकारी को नहीं बल्कि किसी अपने परिवार के सदस्य को विदाई दे रहें हैं. इंस्पेक्टर मनोज कुमार शर्मा पर उनके विभाग के ही नहीं बल्कि भारत नेपाल के सभी विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी बहुत विश्वास करते थे.
`इंस्पेक्टर मनोज कुमार शर्मा के ट्रांसफर को लेकर भारत और नेपाल सीमा के पास के क्षेत्रों के नागरिकों में आक्रोश भी देखा जा रहा है। और वापस लाने की मांग पर गंभीर हैं।



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