कैलाश पर्वत : कई अलौकिक शक्तियों का केंद्र, जहाँ ऊपर स्वर्ग और नीचे मृत्यलोक है
तीज विशेष
डा.श्वेता दीप्ति
भगवान शिव को सनातन संस्कृति देवों के देव महादेव कहा जाता है. इसके अलावा हिंदू धर्म को मानने वाले उन्हें भगवान शंकर भी कहते हैं. उनके महेश, रुद्र, गंगाधर, भोलेनाथ, गिरीश जैसे कई नाम हैं. तंत्र साधना करने वाले भगवान शंकर को भैरव भी कहते हैं. भगवान शंकर को सौम्य और रौद्र दोनों रूपों में पूजा जाता है. भगवान शिव को त्रिदेवों में संहार का देवता माना जाता है. वैसे तो भगवान शिव को हमेशा कल्याणकारी माना जाता है, लेकिन वे लय और प्रलय दोनों को अपने अधीन रखते हैं. ज्यादातर सनातन परंपरा के अनुयायी शिव और शंकर को एक ही मानते हैं. हालांकि, शिव पुराण में जिक्र किया गया है कि सबसे पहले एक प्रकाश पुंज की उत्पत्ति हुई. इस प्रकाश पुंज से ब्रह्मा और विष्णु की उत्पत्ति हुई. जब ब्रह्माजी ने पूछा कि आप कौन हैं तो पुंज से आवाज आई कि मैं शिव हूं. इस पर ब्रह्मा जी ने प्रकाश पुंज से साकार रूप लेने को कहा. फिर उस प्रकाश पुंज से शंकर की उत्पत्ति हुई. इस आधार पर कहा जा सकता है कि शिव और शंकर एक ही शक्ति के अंश है, लेकिन दोनों अलग हैं. दोनों में फर्क इतना है कि शिव प्रकाश पुंज स्वरूप हैं और हम उनकी शिवलिंग के रूप में पूजा करते हैं, जबकि शंकर सशरीर देव स्वरूप हैं.भगवान शिव स्वयंभू हैं यानी खुद ही प्रकट हुए हैं, लेकिन पुराणों में उनकी उत्पत्ति का विवरण मिलता है. विष्णु पुराण के अनुसार, जहां भगवान विष्णु ब्रह्माजी की नाभि से उत्पन्न हुए थे. वहीं, भगवान शिव विष्णु जी के माथे के तेज से उत्पन्न हुए. विष्णु पुराण के मुताबिक, माथे के तेज से उत्पन्न होने के कारण ही शिव-शंभू हमेशा योगमुद्रा में रहते हैं. वहीं, भगवान शिव से एक और मान्यता जुड़ी है कि नंदी और महाकाल भगवान शंकर के द्वारपाल हैं और रुद्रदेवता शंकर की पंचायत के सदस्य हैं.
जातक प्रभु के दर्शन करने के लिए शिव जी के मंदिर भी जाते हैं। जहां वह अपने आराध्य के दर्शन का लाभ उठाते हैं। महादेव को समर्पित कई मंदिर पहाड़ों पर भी हैं, जहां अधिक संख्या में श्रद्धलु दर्शनों के लिए जाते हैं। लेकिन सबसे अधिक महत्तव हिमालय पर्वत का है जहाँ कैलाश पर शिव का वास माना जाता है । कैलाश पर्वत तिब्बत में स्थित एक पर्वत श्रेणी है। इसके पश्चिम तथा दक्षिण में मानसरोवर तथा राक्षसताल झीलें हैं। यहां से कई महत्वपूर्ण नदियां निकलतीं हैं – ब्रह्मपुत्र, सिन्धु, सतलुज इत्यादि। हिन्दू सनातन धर्म में इसे पवित्र माना गया है। इस तीर्थ को अष्टापद, गणपर्वत और रजतगिरि भी कहते हैं। कैलाश के बर्फ से आच्छादित 6,638 मीटर (21,778 फुट) ऊंचे शिखर और उससे लगी मानसरोवर झील तीर्थ है। इस प्रदेश को मानसखंड भी कहते हैं।कैलाश की गिनती दुनिया की सबसे कठिन पर्वत शृंखलाओं में की जाती है। इस वजह से चढ़ाई के लिए इस स्थान को काफी दुर्गम कहा जाता है। अब तक कोई भी तिब्बत में स्थित कैलाश पर्वत के ऊपर चढ़ने में कामयाब नहीं हुआ। भगवान शिव का निवास स्थान कहे जाने वाली इस जगह पर कई पर्वतारोहियों ने चढ़ने की कोशिश की, पर उन्हें इसमें कामयाबी नहीं मिल पाई।
रूस के एक पर्वतारोही सरगे सिस्टियाकोव कैलाश पर्वत के बहुत करीब तक पहुंच गए थे। उन्होंने अपने एक इंटरव्यू में बताया, ‘‘मैं जैसे ही इस पर्वत के करीब पहुंचा मेरे दिल की धड़कन काफी तेज हो गई थी। उस दौरान मुझे काफी कमजोरी महसूस हो रही थी। इसे देखते हुए मैंने वापस जाने का फैसला लिया। नीचे की तरफ मैं जैसे बढ़ा वैसे ही धीरे-धीरे मेरी सेहत में सुधार होने लगा।’’
कुछ इसी तरह का अनुभव एक दूसरे पर्वतारोही कर्नल आर.सी. विल्सन ने भी साझा किया था। उनके अनुसार जैसे ही वह कैलाश पर्वत के नजदीक पहुंचे अचानक ही तेजी से बर्फबारी होने लगी, जिसने उनका रास्ता रोक दिया और आगे जाने नहीं दिया।
कैलाश पर्वत के ऊपर 7 प्रकार की लाइटें चमकती हैं। कई लोगों ने इन लाइटों को चमकते हुए देखने का दावा किया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसा पर्वत के चुंबकीय बल के कारण होता है।
कई वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन में पाया है कि इस जगह पर एक अलौकिक ऊर्जा का प्रवाह है। इसी वजह से कई तपस्वी इस पवित्र स्थान पर आध्यात्मिक क्रियाएं करते हैं, ताकि उनको समाधि का अनुभव मिल सके। यही नहीं, कैलाश पर्वत की आकृति भी एक रहस्य का विषय है। इस पर्वत का आकार एक पिरामिड की तरह दिखता है। कहा जाता है कि कैलाश पर्वत धरती का केंद्र बिंदु है। कई लोग इस जगह को भौगोलिक ध्रुव मानते हैं। लोगों का कहना है कि कैलाश मानसरोवर के आस-पास डमरू और ओम के उच्चारण की ध्वनि सुनाई देती है जो आज भी रहस्य है। कैलाश पर्वत पांच पर्वत श्रृंखलाओं का समूह है, जिसे पंच कैलाश के नाम से जाना जाता है।
कैलाश मानसरोवर
धार्मिक मान्यता के अनुसार, तिब्बत में स्थित कैलाश मानसरोवर को भगवान शिव और मां पार्वती का घर माना जाता है। पौराणिक कथा के मुताबिक, यह वही पवित्र स्थान है, जहां शिव-शंभू विराजमान हैं। कैलाश मानसरोवर का उल्लेख शिव पुराण में देखने को मिलता है।
आदि कैलाश
आदि कैलाश उत्तराखंड में है। इस कैलाश को रुंग समुदाय से जुड़े लोगों का प्रमुख स्थल माना जाता है। रुंग परंपरा के मुताबिक, आदि कैलाश महादेव का मूल निवास था। ऐसा माना जाता है कि यहां पर संतों और अन्य लोगों के आने से महादेव की तपस्या में बाधा आ रही थी, जिसकी वजह से महादेव को इस जगह को छोड़ना पड़ा।
किन्नर कैलाश
किन्नर कैलाश हिमाचल प्रदेश में है। किन्नर कैलाश की यात्रा को अमरनाथ और मानसरोवर की यात्रा से भी बहुत कठिन मानी जाती है। किन्नर कैलाश महादेव के भक्तों के लिए अहम स्थान है।
मणिमहेश कैलाश
मणिमहेश कैलाश हिमाचल प्रदेश में है। इस स्थल पर शिवलिंग के आकार की एक चट्टान है, जिसे महादेव का स्वरूप माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, मणिमहेश कैलाश का निर्माण शिव जी ने मां पार्वती से विवाह करने के पश्चात किया था।
श्रीखंड महादेव कैलाश
श्रीखंड महादेव कैलाश हिमाचल प्रदेश में है। इस कैलाश को महादेव के धार्मिक स्थलों में से सबसे ऊंचा स्थल माना जाता है। इस पर्वत की ऊंचाई समुद्र तल से 18, 300 फीट है। पौराणिक कथा के अनुसार, श्रीखंड महादेव कैलाश पर जगत के पालनहार भगवान विष्णु ने भस्मासुर नामक दैत्य का वध किया था।
कैलाश पर्वत से जुड़े हुए12 रहस्य
रहस्य 1. धरती का केंद्र
धरती के एक ओर उत्तरी ध्रुव है, तो दूसरी ओर दक्षिणी ध्रुव। दोनों के बीचोबीच स्थित है हिमालय। हिमालय का केंद्र है कैलाश पर्वत। वैज्ञानिकों के अनुसार यह धरती का केंद्र है। कैलाश पर्वत दुनिया के 4 मुख्य धर्मों- हिन्दू, जैन, बौद्ध और सिख धर्म का केंद्र है।
रहस्य 2.अलौकिक शक्ति का केंद्र
यह एक ऐसा भी केंद्र है जिसे एक्सिस मुंडी (Axis Mundi) कहा जाता है। एक्सिस मुंडी अर्थात दुनिया की नाभि या आकाशीय ध्रुव और भौगोलिक ध्रुव का केंद्र। यह आकाश और पृथ्वी के बीच संबंध का एक बिंदु है, जहां दसों दिशाएं मिल जाती हैं। रशिया के वैज्ञानिकों के अनुसार एक्सिस मुंडी वह स्थान है, जहां अलौकिक शक्ति का प्रवाह होता है और आप उन शक्तियों के साथ संपर्क कर सकते हैं। धरती पर यह स्थान सबसे अधिक ” शक्तिशाली स्थान ” है।
रहस्य 3.पिरामिडनुमा क्यों है यह पर्वत
कैलाश पर्वत एक विशालकाय पिरामिड है, जो 100 छोटे पिरामिडों का केंद्र है। कैलाश पर्वत की संरचना कम्पास के 4 दिक् बिंदुओं के समान है और एकांत स्थान पर स्थित है, जहां कोई भी बड़ा पर्वत नहीं है। कई बार कैलाश पर्वत पर ” सात तरह के प्रकाश” आसमान में देखें गयें है। इसपर नासा का ऐसा मानना है कि यहाँ चुम्बकीय बल है और आसमान से मिलकर वह कई बार इस तरह की चीजों का निर्माण करता है।रहस्य 4. शिखर पर कोई नहीं चढ़ सकता
कैलाश पर्वत पर चढ़ना निषिद्ध है, परंतु 11वीं सदी में एक तिब्बती बौद्ध योगी मिलारेपा ने इस पर चढ़ाई की थी। रशिया के वैज्ञानिकों की यह रिपोर्ट ‘यूएनस्पेशियल’ मैग्जीन के 2004 के जनवरी अंक में प्रकाशित हुई थी। हालांकि मिलारेपा ने इस बारे में कभी कुछ नहीं कहा इसलिए यह भी एक रहस्य है।
दावा किया जाता है कि आज तक कोई भी व्यक्ति कैलाश पर्वत के शिखर पर नहीं पहुच पाया है। वहीँ 11 सदी में तिब्बत के योगी मिलारेपी के यहाँ जाने का दावा किया जाता रहा है। किन्तु इस योगी के पास इस बात के सबूत नहीं थे या फिर वह खुद सबूत पेश नहीं करना चाहता था। इसलिए यह भी एक रहस्य है कि इन्होनें यहाँ कदम रखा या फिर वह कुछ बताना नहीं चाहते थे।
रहस्य 5.दो रहस्यमयी सरोवरों का रहस्य
यहां 2 सरोवर मुख्य हैं- पहला, मानसरोवर जो दुनिया की शुद्ध पानी की उच्चतम झीलों में से एक है और जिसका आकार सूर्य के समान है। दूसरा, राक्षस नामक झील, जो दुनिया की खारे पानी की उच्चतम झीलों में से एक है और जिसका आकार चन्द्र के समान है। ये दोनों झीलें सौर और चन्द्र बल को प्रदर्शित करती हैं जिसका संबंध सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा से है। जब दक्षिण से देखते हैं तो एक स्वस्तिक चिह्न वास्तव में देखा जा सकता है। यह अभी तक रहस्य है कि ये झीलें प्राकृतिक तौर पर निर्मित हुईं या कि ऐसा इन्हें बनाया गया? ऐसा कैसे हुआ है यह भी कोई नहीं जानता है।
रहस्य 6.यहीं से क्यों सभी नदियों का उद्गम
इस पर्वत की कैलाश पर्वत की 4 दिशाओं से 4 नदियों का उद्गम हुआ है- ब्रह्मपुत्र, सिन्धु, सतलज व करनाली। इन नदियों से ही गंगा, सरस्वती सहित चीन की अन्य नदियां भी निकली हैं। कैलाश की चारों दिशाओं में विभिन्न जानवरों के मुख हैं जिसमें से नदियों का उद्गम होता है। पूर्व में अश्वमुख है, पश्चिम में हाथी का मुख है, उत्तर में सिंह का मुख है, दक्षिण में मोर का मुख है।
रहस्य 7.सिर्फ पुण्यात्माएं ही निवास कर सकती हैं
यहां पुण्यात्माएं ही रह सकती हैं। कैलाश पर्वत और उसके आसपास के वातावरण पर अध्ययन कर चुके रशिया के वैज्ञानिकों ने जब तिब्बत के मंदिरों में धर्मगुरुओं से मुलाकात की तो उन्होंने बताया कि कैलाश पर्वत के चारों ओर एक अलौकिक शक्ति का प्रवाह है जिसमें तपस्वी आज भी आध्यात्मिक गुरुओं के साथ टेलीपैथिक संपर्क करते हैं।
यहाँ के आध्यात्मिक और शास्त्रों के अनुसार रहस्य की बात करें तो कैलाश पर्वत पे कोई भी व्यक्ति शरीर के साथ उच्चतम शिखर पर नहीं पहुच सकता है। ऐसा बताया गया है कि, यहाँ पर देवताओं का आज भी निवास हैं। पवित्र संतों की आत्माओं को ही यहाँ निवास करने का अधिकार दिया गया है।
रहस्य 8. डमरू और ओम की आवाज
यदि आप कैलाश पर्वत या मानसरोवर झील के क्षेत्र में जाएंगे, तो आपको निरंतर एक आवाज सुनाई देगी, जैसे कि कहीं आसपास में एरोप्लेन उड़ रहा हो। लेकिन ध्यान से सुनने पर यह आवाज ‘डमरू’ या ‘ॐ’ की ध्वनि जैसी होती है। वैज्ञानिक कहते हैं कि हो सकता है कि यह आवाज बर्फ के पिघलने की हो। यह भी हो सकता है कि प्रकाश और ध्वनि के बीच इस तरह का समागम होता है कि यहां से ‘ॐ’ की आवाजें सुनाई देती हैं।
रहस्य 9. आसमान में लाइट का चमकना
दावा किया जाता है कि कई बार कैलाश पर्वत पर 7 तरह की लाइटें आसमान में चमकती हुई देखी गई हैं। नासा के वैज्ञानिकों का ऐसा मानना है कि हो सकता है कि ऐसा यहां के चुम्बकीय बल के कारण होता हो। यहां का चुम्बकीय बल आसमान से मिलकर कई बार इस तरह की चीजों का निर्माण कर सकता है।
रहस्य 10. येति मानव का रहस्य
हिमालयवासियों का कहना है कि हिमालय पर यति मानव रहता है। कोई इसे भूरा भालू कहता है, कोई जंगली मानव तो कोई हिम मानव। यह धारणा प्रचलित है कि यह लोगों को मारकर खा जाता है। कुछ वैज्ञानिक इसे निंडरथल मानव मानते हैं। विश्वभर में करीब 30 से ज्यादा वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि हिमालय के बर्फीले इलाकों में हिम मानव मौजूद हैं।
रहस्य 11. कस्तूरी मृग का रहस्य
दुनिया का सबसे दुर्लभ मृग है कस्तूरी मृग। यह हिरण उत्तर पाकिस्तान, उत्तर भारत, चीन, तिब्बत, साइबेरिया, मंगोलिया में ही पाया जाता है। इस मृग की कस्तूरी बहुत ही सुगंधित और औषधीय गुणों से युक्त होती है, जो उसके शरीर के पिछले हिस्से की ग्रंथि में एक पदार्थ के रूप में होती है। कस्तूरी मृग की कस्तूरी दुनिया में सबसे महंगे पशु उत्पादों में से एक है।

