विश्व नेपाली साहित्य महासंघ नेपाल शाखा का पाँचवाँ अधिवेशन सम्पन्न, नई कार्यसमिति गठन
नेपालगंज (बाँके), पवन जायसवाल ।
विश्व नेपाली साहित्य महासंघ नेपाल शाखा का पाँचवाँ अधिवेशन भव्य रूप से सम्पन्न हुआ है। अधिवेशन की अध्यक्षता नेपाल शाखा की अध्यक्ष कल्पना पौडेल ‘जिज्ञासु’ ने की। इस अवसर पर पुरानी कार्यसमिति को विघटन कर नई कार्यसमिति का गठन किया गया, जिसमें प्रा. डा. घनश्याम न्यौपाने ‘परिश्रमी’ को अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
केन्द्रीय कार्यसमिति के अध्यक्ष सुरेन्द्र लिम्बु ‘परदेशी’ और महासचिव सुनिता राई ‘कन्दङ्वा’ की उपस्थिति में २७ सदस्यीय नेपाल शाखा की कार्यसमिति की घोषणा की गई। मणिराज सिंह के संयोजन में बनी इस कार्यसमिति में वरिष्ठ उपाध्यक्ष ऋषिराम सापकोटा, उपाध्यक्ष रबिन्द्र आशिष और उषा आचार्य, महासचिव अञ्चु सुबेदी, सचिव लेखप्रसाद प्याकुरेल, सह-सचिव सुनिता अधिकारी, संचार सचिव कृष्ण बहादुर केसी, कोषाध्यक्ष द्वारिका कुइँकेल और सह-कोषाध्यक्ष जॉयस जया शामिल हैं।
अन्य सदस्यगण में डा. देवी पन्थी, मणिराज दहाल, तोयनाथ सुवेदी, प्रकाश अधिकारी, सुरेश कुमार पाण्डे, चन्द्र रावत ‘गुराँस’, बाबुराम आचार्य, ढुण्डीराज ढकाल, बोधकुमार धिमिरे, राजेश्वरी काफ्ले, प्रेम थापा, हरिप्रिया रिजाल, प्रेम ओली ‘ढकलपुरे’, भुवन सिवाकोटी ‘चौघरे’, इन्दिरा चापागाईं, हारित रेग्मी और नीला घिमिरे शामिल हैं।
यह अधिवेशन आदिकवि भानुभक्त आचार्य की ११२वीं जन्मजयन्ती के अवसर पर आयोजित किया गया। कार्यक्रम में प्राज्ञ सभा सदस्य महानन्द ढकाल, केन्द्रीय अध्यक्ष सुरेन्द्र लिम्बु परदेशी और अन्य विशिष्ट अतिथियों ने संबोधन दिया। प्रमुख अतिथि प्रा. विधान आचार्य, जो भानुभक्त आचार्य के वंशज हैं, ने आदिकवि की जीवनी, कृतित्व और मोतीराम भट्ट द्वारा किए गए प्रयासों पर सारगर्भित विचार प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम संचालन नेपाल शाखा के वर्तमान सचिव लेखप्रसाद प्याकुरेल ने किया, जबकि डा. घनश्याम न्यौपाने और साहित्यकार पद्मा रिजाल ने भानुभक्त विशेष रचना वाचन किया। चार दर्जन से अधिक देशों से आए नेपाली भाषा एवं साहित्यसेवियों का स्वागत साहित्यकार कृष्ण केसी ने किया।
कार्यक्रम दो चरणों में विभाजित था और इसे भर्चुअल माध्यम से सम्पन्न किया गया। पहले चरण में विनेसाम के विभिन्न प्रादेशिक अध्यक्षों — कोशी से डा. देवी पन्थी, मधेश से मणिराज दहाल, बागमती से तोयनाथ सुवेदी, गण्डकी से प्रकाश अधिकारी, लुम्बिनी से लेखप्रसाद प्याकुरेल, कर्णाली से चन्द्र रावत ‘गुराँस’ और सुदूरपश्चिम से बाबुराम आचार्य — को प्रशंसा-पत्र प्रदान किया गया।
इसके अलावा नेपाली भाषा, साहित्य और समालोचना के क्षेत्र में विशेष योगदान देनेवाले साहित्यसेवियों को ‘विनेसाम साहित्य रत्न सम्मान’ से सम्मानित किया गया। सम्मान पानेवालों में डा. पुष्करराज भट्ट (सुदूरपश्चिम), प्राज्ञ महानन्द ढकाल (लुम्बिनी), देवीप्रसाद शर्मा ‘शव सस्मित’ (गण्डकी), लक्ष्मी कुमारी माली (बागमती), नीला घिमिरे (मधेश) और होम सुवेदी (कोशी) शामिल हैं।
यह अधिवेशन नेपाली भाषा और साहित्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण आयोजन के रूप में देखा जा रहा है, जिसने देश-विदेश में फैले नेपाली साहित्य प्रेमियों को जोड़ने का काम किया है।


