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जेन-जी आंदोलन की आगजनी में पेट्रोलियम पदार्थ के इस्तेमाल की पुष्टि, लेकिन आयोग की रिपोर्ट में नहीं हुआ उल्लेख

 

काठमांडू। नेपाल में 23 भाद्र को हुए चर्चित जेन-जी आंदोलन के अगले दिन देश के प्रमुख सरकारी और निजी प्रतिष्ठानों में हुई आगजनी को लेकर एक महत्वपूर्ण फॉरेंसिक खुलासा सामने आया है। जांच में संकेत मिला है कि इन आगजनी की घटनाओं में पेट्रोलियम पदार्थों का इस्तेमाल किया गया था।

 भारत में हुई फॉरेंसिक जांच

आगजनी स्थलों से एकत्र किए गए नमूनों को जांच के लिए भारत भेजा गया था। वहां किए गए परीक्षण में “पेट्रोलियम हाइड्रोकार्बन” के अवशेष पाए गए हैं। इसका मतलब यह है कि आग लगाने के लिए किसी न किसी प्रकार के पेट्रोलियम-आधारित ज्वलनशील पदार्थ का उपयोग किया गया था।

हालांकि यह रिपोर्ट लगभग एक सप्ताह पहले काठमांडू पहुंच चुकी थी, लेकिन गौरीबहादुर कार्की के नेतृत्व वाले 23-24 भाद्र घटना जांच आयोग की अंतिम रिपोर्ट में इस तथ्य को शामिल नहीं किया जा सका।

रिपोर्ट देर से मिलने की वजह

जांच समिति के एक सदस्य के अनुसार शुरुआत में नमूनों को नेपाल पुलिस की विधि विज्ञान प्रयोगशाला में भेजा गया था, लेकिन वहां स्पष्ट परिणाम नहीं मिलने के कारण उन्हें विदेश भेजने का निर्णय लिया गया।
आखिरकार सरकार ने नमूनों को भारत भेजा।

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समिति के सदस्य ने कहा:

“जब तक हमारी रिपोर्ट अंतिम चरण में पहुंची, तब तक परीक्षण का नतीजा हमें नहीं मिला था, इसलिए उसे शामिल नहीं किया जा सका।”

 प्रमुख स्थलों से लिए गए नमूने

फॉरेंसिक परीक्षण के लिए पुलिस ने कई महत्वपूर्ण स्थानों से राख और अन्य अवशेष इकट्ठा किए थे, जिनमें शामिल हैं:

  • सिंहदरबार (प्रमुख प्रशासनिक केंद्र)
  • सर्वोच्च अदालत भवन
  • संसद भवन
  • राष्ट्रपति कार्यालय
  • कान्तिपुर पब्लिकेशन्स
  • भाटभटेनी सुपरमार्केट

यहां तक कि एक ही आगजनी स्थल से कई अलग-अलग जगहों से नमूने लिए गए थे ताकि सटीक परिणाम मिल सके।

 अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उठा था सवाल

अमेरिकी अखबार “The New York Times” ने भी 24 भाद्र की आगजनी पर रिपोर्ट प्रकाशित करते हुए रासायनिक पदार्थों के इस्तेमाल की आशंका जताई थी। उसी के बाद जांच आयोग और पुलिस ने इस दिशा में अधिक गंभीरता से जांच शुरू की।

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घटना के लगभग डेढ़ महीने बाद पुलिस ने नमूना संग्रह अभियान शुरू किया

 जांच प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ी

नेपाल में परीक्षण संभव न होने के कारण नमूनों को

  • नेपाल पुलिस की फॉरेंसिक लैब
  • गृह मंत्रालय
  • विदेश मंत्रालय
  • भारत स्थित नेपाली दूतावास

के समन्वय से भारत भेजा गया।

सूत्रों के अनुसार, करीब 3 किलो नमूना एक डीएसपी स्तर के अधिकारी खुद दिल्ली लेकर गए थे। वहां भारतीय विदेश मंत्रालय के सहयोग से उन्हें प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया।

 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर संदिग्ध चर्चा

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि जेन-जी आंदोलन से जुड़े कुछ युवाओं के Discord प्लेटफॉर्म पर बने “Youth Against Corruption” और “Yuva Hub” नामक सर्वरों में सोडियम और पेट्रोल से बम बनाने पर चर्चा हुई थी।

जांच में पाया गया कि “Molotov Cocktail” शब्द का इस्तेमाल 356 बार किया गया था।
हालांकि आयोग ने कहा कि उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर यह संगठित और योजनाबद्ध आगजनी थी, यह निर्णायक रूप से साबित नहीं हो सका।

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 उच्च अधिकारियों पर भी जांच की सिफारिश

कार्की आयोग ने 23-24 भाद्र की घटनाओं के संदर्भ में कई उच्च अधिकारियों पर जांच और कार्रवाई की सिफारिश की है, जिनमें शामिल हैं:

  • तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली
  • तत्कालीन गृहमंत्री रमेश लेखक
  • नेपाल पुलिस के तत्कालीन आईजीपी चन्द्रकुवेर खापुङ
  • काठमांडू के तत्कालीन प्रमुख जिला अधिकारी छवि रिजाल

76 लोगों की गई थी जान

23 भाद्र के जेन-जी आंदोलन के दौरान हुए सरकारी दमन और 24 भाद्र को हुए प्रदर्शनों के दौरान कुल 76 लोगों की मौत हुई थी, जिसने पूरे देश में राजनीतिक और सामाजिक बहस को तेज कर दिया। (कांतिपुर तथा अन्य पत्र पत्रिका में प्रकाशित समाचार पर आधारित)

 

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