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भारत और चीन को एक ही स्थान पर नही रखा जा सकता: मधुरमण आचार्य

 

काठमांडू, ३ सेप्टेम्बर | इन दिनों समाजिक संजाल  पर भारत विरोधी मानसिकता से ग्रसित लोगों द्वारा भारत के विरोध में टिका टिप्पणी जोड़ पर  है | सरकार द्वारा भारत के साथ जैसा सम्बन्ध है वैसा ही चीन के साथ भी सम्बन्ध रखने की बात एक प्रकार के बुद्धिजीवियों का तर्क है |

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वहीं परराष्ट्रविद मधुरमण आचार्य कहतें हैं कि नेपाल एक विकासोन्मुख गरिब राष्ट्र है इसलिए दोनों पड़ोसी चीन और भारत के साथ एक ही प्रकार का सम्बन्ध उचित नही होगा | भारत के साथ जैसा करेगे चीन के साथ भी वैसा ही संतुलन करने की मानसिकता नेपाल में है | लेकिन उनके अनुसार दोनों राष्ट्र को एक ही स्थान पर नही रखा जासकता  है क्योंकि दो हाथी लड़े भी तो और नाचे भी तो घास ही रौंदे जाते है | कूटनीतिक सम्बन्ध कैसा बनाना चाहिए इस सन्दर्भ में श्री आचार्य ने सरकार को यह सुझाव दिया है |

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श्री आचार्य का सुझव इस प्रकार है :

लोकतंत्र मजबूत नही होने पर परराष्ट्रनीति भी सफल नही होती है | नेताओं द्वारा गोप्य भेटघाट करना , कूटनीतिक भेट में परराष्ट्रविद नही रखना यह परराष्ट्र नीति के खिलाप है तथा नेताओं के लिए भी घातक है |  व्यक्तिगत कूटनीति के आधार पर देश चलाना उचित नही है । विदेश जाने से पहले सबों से बातचित करके जाना चाहिए |

 दो पड़ोसी राष्ट्र को कभी भी एक स्थान पर नही रखा जा सकता है |
नेपाल आर्थिक उन्नति के हिसाब से छोटा देश है, चीन और भारत बड़ा देश है ।   इसलिए नेपाल और भारत के बीच में डायनामिक पुल बनना जरुरी है । नेपाल उड़ते हुये  ड्रागन और दौड़ते हुये हाथी के बीच में धीमी गति में चल रहे  कछुवा है ।

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यह तो अब स्पष्ट हो गया कि नाकाबन्दी के समय  ट्रिटी स्रीटी वा संयुक्त राष्ट्रसङ्घ का समझौता वा ज्ञापन कुछ भी काम नही लगेगा  । लेकिन उस समय अगर हम  आर्थिक रुप में सम्पन्न रहते तो बहुत कुछ कर सकते थे | अगर उस समय हम  २० हजार मेगावाट बिजुली निकालते रहते तो कुछ भी बहाना करके  हम बिजली बन्द कर सकते थे | हमे उस रूप में क्षमता विकास करना जरुरी है । कूटनीतिक शक्ति का स्रोत आर्थिक विकास ही है । जैसे अभी  चीन ने  सिल्करोड की बात निकला है |

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राजनीति करने वाले  कूटनीति न करें

कूटनीति करने के लिए कूटनीतिक तह को ही दिया जाना  चाहिए । राजनीति करने वालों को कूटनीति  नही करना चाहिये । भारत के साथ नाकाबन्दी के समय  कूटनीति फेल होने की बात है | लेकिन वह बात नही है  | राजनीति करने वाले जब कूटनीति करते हैं तो ऐसा ही होता है | उस समय सफ्ट पावर भी प्रयोग करना चाहिये । सरकार में होने वालो को विदेशी के साथ  सहयोग और हस्तक्षेप करके सम्बन्ध सुधारना चाहिए ।

उपप्रधान मन्त्री निधीजी तथा अन्य काङ्ग्रेस के मन्त्रीगण,  राजनीति भी कूटनीति पर आधारित है ।इसे जरुर मिलिएगा |

 

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