Sat. May 2nd, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

भारत और चीन को एक ही स्थान पर नही रखा जा सकता: मधुरमण आचार्य

 

काठमांडू, ३ सेप्टेम्बर | इन दिनों समाजिक संजाल  पर भारत विरोधी मानसिकता से ग्रसित लोगों द्वारा भारत के विरोध में टिका टिप्पणी जोड़ पर  है | सरकार द्वारा भारत के साथ जैसा सम्बन्ध है वैसा ही चीन के साथ भी सम्बन्ध रखने की बात एक प्रकार के बुद्धिजीवियों का तर्क है |

madhuraman-acharya.png-1

वहीं परराष्ट्रविद मधुरमण आचार्य कहतें हैं कि नेपाल एक विकासोन्मुख गरिब राष्ट्र है इसलिए दोनों पड़ोसी चीन और भारत के साथ एक ही प्रकार का सम्बन्ध उचित नही होगा | भारत के साथ जैसा करेगे चीन के साथ भी वैसा ही संतुलन करने की मानसिकता नेपाल में है | लेकिन उनके अनुसार दोनों राष्ट्र को एक ही स्थान पर नही रखा जासकता  है क्योंकि दो हाथी लड़े भी तो और नाचे भी तो घास ही रौंदे जाते है | कूटनीतिक सम्बन्ध कैसा बनाना चाहिए इस सन्दर्भ में श्री आचार्य ने सरकार को यह सुझाव दिया है |

यह भी पढें   बालेन से मधेश की उम्मीदें : कंचना झा

श्री आचार्य का सुझव इस प्रकार है :

लोकतंत्र मजबूत नही होने पर परराष्ट्रनीति भी सफल नही होती है | नेताओं द्वारा गोप्य भेटघाट करना , कूटनीतिक भेट में परराष्ट्रविद नही रखना यह परराष्ट्र नीति के खिलाप है तथा नेताओं के लिए भी घातक है |  व्यक्तिगत कूटनीति के आधार पर देश चलाना उचित नही है । विदेश जाने से पहले सबों से बातचित करके जाना चाहिए |

 दो पड़ोसी राष्ट्र को कभी भी एक स्थान पर नही रखा जा सकता है |
नेपाल आर्थिक उन्नति के हिसाब से छोटा देश है, चीन और भारत बड़ा देश है ।   इसलिए नेपाल और भारत के बीच में डायनामिक पुल बनना जरुरी है । नेपाल उड़ते हुये  ड्रागन और दौड़ते हुये हाथी के बीच में धीमी गति में चल रहे  कछुवा है ।

यह भी पढें   सत्ता पर कब्जे की सोच ने माओवादी आंदोलन को विघटन की कगार पर पहुँचायाः एमाले उपाध्यक्ष पौडेल

यह तो अब स्पष्ट हो गया कि नाकाबन्दी के समय  ट्रिटी स्रीटी वा संयुक्त राष्ट्रसङ्घ का समझौता वा ज्ञापन कुछ भी काम नही लगेगा  । लेकिन उस समय अगर हम  आर्थिक रुप में सम्पन्न रहते तो बहुत कुछ कर सकते थे | अगर उस समय हम  २० हजार मेगावाट बिजुली निकालते रहते तो कुछ भी बहाना करके  हम बिजली बन्द कर सकते थे | हमे उस रूप में क्षमता विकास करना जरुरी है । कूटनीतिक शक्ति का स्रोत आर्थिक विकास ही है । जैसे अभी  चीन ने  सिल्करोड की बात निकला है |

यह भी पढें   ये अध्यादेश किसी व्यक्ति या समूह के स्वार्थ के लिए नहीं वरन नागरिकों के हित के लिए लाया गया है – असिम शाह

राजनीति करने वाले  कूटनीति न करें

कूटनीति करने के लिए कूटनीतिक तह को ही दिया जाना  चाहिए । राजनीति करने वालों को कूटनीति  नही करना चाहिये । भारत के साथ नाकाबन्दी के समय  कूटनीति फेल होने की बात है | लेकिन वह बात नही है  | राजनीति करने वाले जब कूटनीति करते हैं तो ऐसा ही होता है | उस समय सफ्ट पावर भी प्रयोग करना चाहिये । सरकार में होने वालो को विदेशी के साथ  सहयोग और हस्तक्षेप करके सम्बन्ध सुधारना चाहिए ।

उपप्रधान मन्त्री निधीजी तथा अन्य काङ्ग्रेस के मन्त्रीगण,  राजनीति भी कूटनीति पर आधारित है ।इसे जरुर मिलिएगा |

 

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *