Fri. Sep 20th, 2019

हर दिन को बेहतर बनाना है : काजल चौधरी

‘तुम हार के मत बैठ जाओ,
एक नाकामयाबी से, जिन्दगी की हार नहीं होती !
मेहनत से सींचो इस जीवन को,
बिना सींचे जीवन की
बगिया में बहार नहीं होती ! !’

हिमालिनी  अंक जुलाई २०१९ | उक्त पंक्तियाँ बहुमुखी प्रतिभावान मुंबई मायानगरी में संघर्षरत गीतकार, लेखिका, डांसर, मॉडल एवं अभिनेत्री काजल चौधरी द्वारा रचित ३५ कविता संग्रह ‘डायरेक्ट दिल से’ (ँचयm तजभ ज्भबचत) की एक रचना जज्बा से लिया है । काजल का जन्म अलीगढ़, उत्तरप्रदेश में हुआ । इन्होने हरकोर्ट बटलर टेक्नोलाजिकल इंस्टिट्यूट, कानपुर से बी । टेक (इलेक्ट्रोनिक्स एंड कम्युनिकेशन) किया । कुछ समय अभियंता के तौर पर नौकरी भी की । लेकिन काजल ने तो कुछ खास करना था और वो भी साहित्य एवं कला के क्षेत्र में । जी बिलकुल अपनी प्रतिभा पर उन्हें पूरा भरोसा था और उन्होंने सैंकड़ों लोकप्रिय ब्रांड्स के लिए माडलिंग से शुरुआत की । साथ ही भरतनाट्यम एवं कत्थक नृत्य कौशल के दम विभिन्न मंचों पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर दर्शकों को अत्यंत प्रभावित किया । काजल में अभिनय कला के रहते अनेक टेलीविजÞन धारावाहिकों ‘नागिन, वो अपना सा, सी आई डी, सौंधी माटी, कहने को हैं हमसपÞmर आदि में कई किरदार निभाए । पिछले दिनों हमारे ब्यूरो प्रमुख एस.एस. डोगरा (दिल्ली÷भारत) ने काजल चौधरी से बातचीत की । आपके समक्ष प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुख अंश ः
० आप अपने बचपन के कुछ यादगार पल बताएँ जिनकी आपके कैरियर को बनाने में अहम् भूमिका रही हो ?

– मैं जब ढाई वर्ष की रही होंगीं तब मैंने पहली बार अपनी ही सोसाइटी में एक डांसिंग परफॉरमेंस दी थी । इससे भी बड़ी बात रही मेरी माता (उषा चौधरी जी) तथा पिता (राम पाल जी) यानि बचपन ही से मुझे मेरे अभिभावकों ने बहुत प्रोत्साहित किया । बचपन से ही मेरी पढ़ाई के अलावा खेलों में, रचनात्मक कार्यों तथा डांस आदि में अधिक रूचि रही । मेरे माता–पिता ने मुझे बचपन से अपने परिवार अथवा आस–पड़ोस में हर तरह के कार्यक्रमों में पार्टिसिपेशन के लिए भी प्रेरित किया । इन सभी का लाभ मुझे मिला और अपने मनचाहे क्षेत्र में कैरियर बनाने का सौभाग्य भी मिला । जब मैं शायद दसवीं की बोर्ड परीक्षाएं दे रही थी कि अचानक मेरी माता जी के कमर में चोट लग गई, लेकिन मैंने इस स्थिति में भी पूरी हिम्मत से परीक्षा भी दी तथा अपनी माँ की भी पूरी सेवा की । ग्यारवीं–बारहवीं कक्षा में आते–आते पिता जी ट्रान्सफर आन पड़ा और नई जगह जाना और मेरी पढाई का पूरा पाठ्यक्रम बदलना मेरे लिए कभी भी बाधक नहीं बना क्योंकि मैंने धैर्य के साथ अपने सामने हर चुनौती का पूर्ण विश्वास के साथ सामना किया ।

० अपनी जीवन यात्रा से आप खुश हैं कुछ अनुभव शेयर कीजिए ?
– मैंने जो भी सोचा वही किया भी । मेरी अभी तक की जीवन यात्रा बड़ी सुखद रही है । मुझे एक बार छ महीने की ट्रेनिंग करने का मौका मिला लेकिन मैंने अपनी तरफ से बेस्ट देने का प्रयास किया । मुझे दो किताबें भी लिखने का सुअवसर मिला । उम्र से ज्यादा अनुभव किया । मेरा मानना है कि जीवन की प्रत्येक घटना आपको कुछ न कुछ सिखाती है उन्हें हमें चुनौती के तौर पर ले सकते हैं और उन्हें बेहतर कर सुखद अनुभव प्राप्त कर सकते हैं ।

० मॉडलिंग में कैसे शुरुआत हुई ?
– बात उन दिनों की है जब में मैं कॉलेज में इंटर स्टेट प्रतियोगिता में मिस फोटोजेनिक चुनी गई । मैं दिल्ली आई तो मैंने जॉब के साथ–साथ विशेष तौर पर शनिवार–रविवार के दिन मोडलिंग की शुरुआत शुरू की । मैंने अपना पहला प्रोफेशनल पोर्टफोलियो मशहूर फोटोग्राफर सुबोदास से कराया जो अपने ही अंदाज में माडल–फैशन शूट करने में माहिर हैं । उनके द्वारा तैयार मेरे फोटो कुछ ऐड एजेंसी में मुझे काम दिलाने में सहायक साबित हुए । मित्रों का भी समय–समय पर सहयोग मिलता रहा और मैंने मोडलिंग की चकाचौंध भरी लाइन में अपनी जगह स्थापित की । फिर तो काम नियमित रूप से मिलने लगा ।

० आपके जीवन में मायानगरी मुंबई का सपÞmर कैसा रहा ?
– हर दिन को बेहतर बनाना है इसी सोच के साथ ‘चहँुतरफा विकास बहुत बहुमूल्य होता है । मुम्बई में मॉडलिंग करने के साथ–साथ मेरे लेखन का सपÞmर बड़ा रोचक रहा । उसका कारण यह भी रहा कि यहाँ सीरियल आदि में फिमेल के लिए कंटेंट लिखने के विशेष तौर पर अधिक अवसर थे मैंने उसका भरपूर फायदा उठाया और इससे मुझमें अपने लेखन के प्रति विश्वास भी जागृत हुआ । और फिर तो ये सिलसिला नियमित ही चला जा रहा है । इसी लेखन क्षेत्र में मेरी किताब ‘डायरेक्ट दिल से’ ाचयm तजभ जभबचत ने भी अनोखी पहचान बनाई जिसे सुप्रसिद्द लेखक–निर्माता–निर्देशक राज कुमार संतोषी एवं साहित्यकार–पठकथा लेखक सी ।एल । सैनी जैसे नामी लोगों ने भी सराहा ।

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