Wed. Oct 23rd, 2019

मोदी-शी के बीच शिखर वार्ता संपन्‍न, सी नेपाल के लिये रमाना

मामल्लापुरम (तमिलनाडु) : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने शनिवार को कारोबार, निवेश और सेवा क्षेत्र से जुड़े विषयों पर एक नया तंत्र स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की.चीनी राष्ट्रपति ने दोनों देशों के बीच व्यापार असंतुलन पर कदम उठाने सहित महत्वपूर्ण क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की. विदेश सचिव विजय गोखले ने शनिवार को संवाददाताओं को बताया कि समुद्र के किनारे भव्य मामल्लापुरम में अनौपचारिक शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी के बीच कुल मिलाकर छह घंटे आपसी चर्चा हुई.

गोखले ने यह भी बताया कि इस अनौपचारिक शिखर सम्मेलन में शी ने आश्वासन दिया कि क्षेत्रीय समग्र आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) को लेकर भारत की चिंताओं पर विचारविमर्श किया जाएगा. विदेश सचिव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की बातचीत वुहान शिखर सम्मेलन के बाद की प्रगति पर केंद्रित रही और अनौपचारिक शिखर सम्मेलन में न तो कश्मीर मुद्दा उठा और न ही इस पर कोई चर्चा हुई.

राष्ट्रपति शी ने दोनों देशों के बीच और अधिक सम्पर्क पर जोर दिया और खास तौर पर रक्षा क्षेत्र में सम्पर्क बढ़ाने का जिक्र किया. विदेश सचिव ने बताया शी और मोदी दोनों ने ही कहा कि दोनों देशों को भविष्य की ओर देखने की जरूरत है. साथ ही दोनों नेताओं ने इस बात पर भी सहमति जताई कि दोनों देशों को आतंकवाद की चुनौती से निपटने के लिए साथ काम करना चाहिए.

चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ पिछले दो दिनों में कई सत्रों में हुई आमने-सामने की करीब छह घंटे की बातचीत के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को कहा कि चेन्नई संपर्क के जरिए भारत और चीन के संबंधों में सहयोग का आज से एक नया युग शुरू होने जा रहा है.

गोखले ने यहां संवाददाताओं को बताया कि मोदी – शी की बातचीत मुख्यत: वुहान शिखर सम्मेलन के बाद की प्रगति पर केंद्रित रही. शी मोदी के साथ शिखर वार्ता के लिए कल शुक्रवार को करीब 24 घंटे के भारत दौरे पर आए, जिसकी शुरुआत तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई से करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित मामल्लापुरम में हुई। दोनों की इस प्रकार की पहली वार्ता पिछले साल वुहान में हुई थी.

गोखले के अनुसार, राष्ट्रपति शी ने कहा कि चीन व्यापार घाटा कम करने के लिए ठोस कदम उठाने की खातिर तैयार है. उन्होंने यह भी बताया कि दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि व्यापार और निवेश संबंधी मुद्दों के लिए एक नया तंत्र स्थापित किया जायेगा जो कारोबार, निवेश एवं सेवा क्षेत्र से जुड़ा होगा.

चीन की तरफ से उप प्रधानमंत्री हु छुन ह्वा और भारत की तरफ से वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इसका नेतृत्व करेंगे. गोखले ने कहा कि इसकी रुपरेखा राजनयिक चैनलों के जरिये तय हो जायेगी.

चीनी राष्ट्रपति ने आईटी और फार्मा क्षेत्र में भारत की ओर से चीन में निवेश का स्वागत किया. दोनों देशों ने इस प्रस्तावित तंत्र के जरिये विनिर्माण क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया. गोखले ने बताया कि चीन के राष्ट्रपति ने रक्षा सहयोग बढ़ाने की जरूरत के बारे में बात की और आश्वासन दिया कि क्षेत्रीय समग्र आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) को लेकर भारत की चिंताओं पर विचारविमर्श किया जाएगा.

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने नियम आधारित वैश्विक व्यापार प्रणाली के महत्व पर जोर दिया। साथ ही दोनों नेताओं ने महसूस किया कि दोनों देशों को महत्वपूर्ण क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर सहयोग करना चाहिए. दोनों देशों ने राजनयिक संबंधों के 70 वर्ष पूरे होने पर 70 कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय किया है जिसमें 35 कार्यक्रम भारत में और 35 कार्यक्रम चीन में होंगे.

गोखले ने बताया कि इस तरह से प्रत्येक सप्ताह एक कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे. दोनों नेताओं ने इस तरह की अनौचारिक वार्ता को बढ़ावा देने पर सहमति व्यक्त की. वार्ता के दौरान एक विषय व्यापार असंतुलन का रहा. गोखले ने बताया कि इस विषय पर प्रधानमंत्री की बात सुनने के बाद राष्ट्रपति शी ने कहा कि चीन इस दिशा में कदम उठाने को तैयार है कि किस प्रकार से इस असंतुलन को कम किया जाए.

क्षेत्रीय समग्र आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) को लेकर भारत की चिंताओं पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत इसको लेकर आशान्वित है, लेकिन इसमें संतुलन होना चाहिए. कारोबार, सेवा और निवेश में संतुलन होना चाहिए.

गोखले के अनुसार, इस पर राष्ट्रपति शी ने कहा कि इस विषय पर भारत की चिंताओं पर ध्यान दिया जायेगा. उल्लेखनीय है कि आरसीईपी 16 देशों का प्रस्तावित साझा कारोबार ब्लाक है.

दोनों नेताओं के बीच यह शिखर वार्ता ऐसे समय में हुई जब जम्मू-कश्मीर से विशेष दर्जा वापस लेने के भारत के फैसले पर दो एशियाई देशों के बीच तनाव उत्पन्न हुआ.

एक घंटे तक वार्ता एक घंटे तक दोनों नेताओं डेलीगेशन लेवल की जो वार्ता हुई, उसमें एनएसए अजित डोवाल और विदेश मंत्री एस जयशंकर भी शामिल थे। दोनों नेताओं ने साथ में लंच किया और इसके बाद दोनों नेता एक बार फिर वन-टू-वन मीटिंग के लिए कुछ देर के लिए मिले। यहां से जिनपिंग नेपाल के लिए रवाना हो गए हैं। विदेश सचिव विजय गोखले ने बताया कि दोनों नेताओं के बीच डिनर पर एक खुली चर्चा हुई और करीब ढाई घंटे तक दोनों नेता साथ थे। उन्‍होंने बताया कि दोनों नेताओं ने माना है कि भारत और चीन दोनों ही विशाल देश हैं और चरमपंथ दोनों देशों के लिए चिंता का विषय है। विजय गोखले के शब्‍दों में पीएम मोदी और राष्‍ट्रपति जिनपिंग ने एक साथ इस दिशा में काम करने पर रजामंदी जताई है कि चरमपंथ और आतंकवाद दोनों की वजह से देशों की बहुआयामी संस्‍कृति को नुकसान नहीं होना चाहिए। डिनर से पहले पीएम मोदी और राष्‍ट्रपति जिनपिंग के बीच जो वार्ता हुई उसमें सिर्फ ट्रांसलेटर्स ही मौजूद थे।

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