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वतन के वास्ते : स्मृति श्रीवास्तव

 

वतन के वास्ते

एक दीपक जल रहा,
देखो वतन के वास्ते।
एक ही मंजिल सपहर की,
ना अलग है रास्ते।
एक दीपक जल रहा,
देखो वतन के वास्ते।

दीप की लौ भी प्रखर है,
राष्ट्रभक्ति की लहर है,
देखती हूं मैं इन्हें,
हर घर से यूहीं झाँकते।
एक दीपक जल रहा,
देखो वतन के वास्ते।

आपदा की इस घड़ी में,
जिंदगी भी जब जटिल हो,
लाशों से बिखरा पड़ा ये,
विश्व का भूमि पटल हो।
जलते रहना दीप यूहीं,
उम्मीदों को संवारते।
एक दीपक जल रहा,
देखो वतन के वास्ते ।

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एक दीपक जल रहा,
देखो वतन के वास्ते ।

उम्मीदों और आशाओं का दीपक जलाएं रखें, वो सुबह जल्द ही आएगी जब इस अंधकार का भी समूल नाश होगा

स्मृति श्रीवास्तव, शिक्षिका, डी.ए.वी स्कूल, काठमाण्डू।

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