विकल्प दो ही हैं, दुबके पड़े रहो या फिर लड़ना प्रारम्भ करो : वृषेश चन्द्र लाल
स्थानीय तह, प्रदेश और संघ सब किंकर्तव्यविमूढ़ हैं । हमारी स्थिति कोने में डर से दुबके हुए या फिर विस्तर पर असहाय पड़े विवश की जैसी है ।
उन सभी को जिससे यह सम्बन्धित है- अपील
‘कोविड १९’ की महामारी से हम सभी आक्रन्त हैं । मालूम नहीं, यह चरमोत्कर्ष (climax) तक पहुँच भी गया है या और अधिक मुश्किलों से गुजरना अभी बांकी ही है ! जो भी हो, इस आपदा से जूझने के लिए आवश्यक संसाधनों का दुखदायी स्तर तक कमी होना पीड़ा को त्रासदी में बदल दिया है । राज्य के तीनों तह के सरकारों द्वारा जिन सुविधाओं को आम जनता तक मुहैया किया जाना चाहिए था, बिल्कुल ही आभाव देखा जा रहा है । देखते-देखते आक्सीजन, आईसीयू, भेन्टीलेटर के आभाव में तो कहीं-कहीं स्वास्थोपचार में लापरवाही के कारण परिजनों का निधन का दुःख कितना असहनीय होता है, कोई भी महशूस कर सकता है । सरकारी कोष से कितना खर्च किया गया, यह बहस का अभी का विषय नहीं है । होना भी नहीं चाहिए । इसकी जबाफदेही और लेखा की देयता खर्च करनेबालों की है जिसे समय पर उन्हें निर्वाहना ही पड़ेगा । फिर भी ऐसी परिस्थिति में भी अगर किसी को कदाचार का मौका दिखाई देता है तो उसे मानवोचित नहीं कहा जा सकता । ऐसे हृदय को मानवीय संवेदना से बंजर ही कहा जाएगा । और मुझे विश्वास है, ऐसा नहीं होगा । ईश्वर ऐसा होने नहीं देंगे ।
अभी का समय व्यवस्थापन का है । कमीयों को जल्द से जल्द दूर करने के लिए दृढ़ता से कदम उठाने का है ।
शुरुवात के दिनों में ऐसा लगा था कि इस मामले में तीन तह की सरकारें, समाजसेवी समूह और आम जनता बहुत ही सचेष्ट हैं । लोग कोरोना विरुद्ध के युद्ध में कुद ही पड़े हैं । मुझे तो शुरुवाती सक्रियता आवश्यकता से कुछ अधिक ही लगा था । क्योंकि शुरुवाती क्षण तो कोरोना का दस्तक भर था । प्रवेश की कोशिश थी जिसे हम तत्काल के लिए रोक सकते थे और बाद की तैयारी में जुट सकते थे । इस बात को ध्यान मे राखना जरुरी था कि अन्य आपदाओं से यह बहुत ही भिन्न है | हमने रोकने का प्रयास किया, लेकिन घुस जाये तो कैसे लड़ेंगे इसके लिए कोई तैयारी नहीं की । दस्तक और प्रवेश के बीच के अन्तराल में अपने हथियारों को साफ भी नहीं किया । परिणाम अब सामने है । हम, स्थानीय तह, प्रदेश और संघ सब किंकर्तव्यविमूढ़ हैं । हमारी स्थिति कोने में डर से दुबके हुए या फिर विस्तर पर असहाय पड़े विवश की जैसी है ।
अब विकल्प दो ही हैं – १. दुबके पड़े रहो या फिर २. लड़ना प्रारम्भ करो । सेना तो मूलतः स्थानीय तह, प्रदेश और संघ को ही बनना होगा क्योंकि व्यवस्थापन तथा ऐसी परिस्थितियों में लड़ने की जिम्मेवारी इन्होंने ही, स्वेच्छा से, ले रखी है । कर्मचारीतन्त्र और स्वास्थकर्मी स्वेच्छा से ही इस जिम्मेदारी को व्यवसाय के रुप में अपनाया है । ऐसे ही परिस्थिति और समय के लिए सबने कसमें खाई है । समाजसेवी और सचेष्ट नागरिक पृष्ठपोषण करने के लिए आप से आप आगे आ जायेंगे । आम पब्लिक भी इन सब के पीछे स्वस्फूर्त खड़ा हो जाएगा ।
कोविड से कैसे लड़ा जाय ?
संघ, प्रदेश और स्थानीय तहों ने, अपनी-अपनी क्षमता से जो कर सकते हैं, किया है । धन्यवाद के पात्र हैं । फिर भी कमी तो है । इसे स्वीकारना ही महानता होगा और स्वीकार कर के आगे का रास्ता बनाना जिम्मेवारी पालन करना होगा । देखी गई कमजोरीयाँ हटाने के लिए खास करके प्रदेश स्तर पर समन्वय, जबर्दस्त सहकार्यीय वातावरण निर्माण और समुचित व्यवस्थापन की आवश्यकता है क्योंकि आनेबाले दिनों मुश्किलें और भी बढ़ेंगी । अतएव, जो भी मैकेनिज्म अभी कार्यान्वयन में है उसे जारी रखा जाय और निम्नलिखित बातों के लिए शिघ्रातिशिघ्र कदम बढ़ाया जाय –
१. विज्ञता सेवा – प्रदेश स्तर पर, उपलब्ध साधन और मानवीय श्रोत के आधार पर गम्भीरता से स्थिति विश्लेषण करते हुए व्यवहारिक रणनैतिक सुझाव देने के लिए सक्षम एवं प्रतिवद्ध विज्ञों की टोली हो जिसमें व्यवसायिक स्वास्थ्य विज्ञ, महामारी नियन्त्रण के अनुभवी तथा रणनीतिकार योजनाविद् हों । प्रदेश सरकार उनके सुझावों को तुरत लागू करे और स्थानीय तहों से अनिवार्यतः कार्यान्वित करावें ।
२. चिकित्सा प्रोटोकल- विज्ञ टोली चिकित्सक एवं अन्तर्राष्ट्रिय कोविड चिकित्सा प्रोटोकोल के आधार पर प्रदेश के लिए चिकित्सा प्रोटोकोल जारी करे । इसे समय-समय पर पुनरावलोकन और परिमार्जित किया जाय ।
३. समन्वय एवं व्यवस्थापन – स्थानीय तहों में कार्यान्वयन के लिए जिलों में प्रदेश से मनोनित जिम्मेवार नेतृत्त्व के अध्यक्षता में सभी स्थानीय निकायों के मेयर/अध्यक्ष की एक कोविड नियन्त्रण, कार्यान्वयन और समन्वय समिति गठन किया जाय जिसमें सभी स्थानीय तह के कार्यकारी अधिकृत और जिले के सुरक्षा निकायों के प्रमुखों की भी सहभागिता हो । प्रमुख जिला अधिकारी इस कोविड नियन्त्रण, कार्यान्वयन और समन्वय समिति के सदस्य सचिव हों ।
४. प्राथमिकता – सम्भव हो तो प्रदेश और स्थानीय तह आवश्यक सेवा आपूर्त्ति संयन्त्रों को मजबूत करने के अलावा अन्य कार्यों को महामारी के अवधि तक प्राथमिकता में न रखे । कृषि और उत्पादन क्षेत्र को प्राथमिकता में रखा जाय । मछली उत्पादन, तरकारी खेती, ऊँख खेती तथा अन्य घरेलू उत्पादन में वृद्धि के लिए सरकार पैकेज में कार्यक्रम लावें ।
५. अस्पताल निर्माणः कोविड नियन्त्रण के लिए वर्त्तमान में किए जा रहे सेवाओं को निरन्तरता देते हुए कम से कम प्रत्येक दो जिलों पर सम्भव सुविधाओं के साथ 500+50 बेड का एक अस्थायी कोविड अस्पताल का निर्माण कार्य Pre-five तकनीक पर तत्काल शुरु किया जाय ताकि कल की अवस्था में अस्पताल और बेड की कमी न हो । अस्पताल स्थल के लिए सार्वजनिक जमीन चुना जाय । वो सार्वजनिक जमीनें, जो किसी संस्थान/समूह ने सरकार से किसी खास कार्य के लिए लिया हो मगर शर्त के अनुसार कार्य न कर व्यक्तिगत सम्पत्त बना ली हो, उसे प्रयोग करने से जरा भी न हिचका जाय । उदाहरण के लिए जनकपुर के गुठी के जमीन को मणिपाल ग्रुप शर्त के विपरित कब्जा करके रखा है । शर्त एवं समयावधि उल्लंघन से अब वो जमीन उनकी नहीं रह गई यह कर चला जाय ।
इन अस्पतालों में 500 बेड लक्षणबाले मरीजों के लिए और 50 बेड आक्सीजन लेने पर मजबूर लोगों के लिए हो । इससे भी अवस्था बिगड़े तो उच्च वा केन्द्रीय अस्पतालों में भेजने की व्यवस्था हो । प्रदेश स्वास्थ्य विभाग व्यवस्थापन व समन्वय का काम करे । आर्थिक श्रोत प्रदेश और स्थानीय तहों के बजेट से लिया जाय । मानव-संसाधन की व्यवस्था प्रदेश स्वास्थ्य विभाग करे ।
६. सूचना – मिडिया, स्तन्त्र पत्रकार तथा नागरिक को आधिकारिक सूचना प्रदान करने के लिए प्रत्येक जिला में तथा प्रदेश की राजधानी में विशेष सूचना सेलों का निर्माण किया जाय जो नियमित रुप से सूचना सार्वजनिक करने का काम करे । ईस से जनता में भ्रामक सूचना या अफवाह का प्रसार को नियन्त्रित किया जा सकेगा । धन्यवाद ।
सादर,
वृषेश चन्द्र लाल
११ भाद्र, २०७७
वाल से साभार


