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वसंत : नंदा पांडेय

नंदा पाण्डेय
 

नंदा पाण्डेय

नंदा पाण्डेय
नंदा पाण्डेय
इस वसंत कुछ ऐसा हो वसंत के उन्माद में भावना के विहग में डाल के हर फूल में पथिक के मधुर राग में तिमिर की घनी छांव में.... रश्मि के आवरण में मुक्त मन के स्नेह में मन के उजले दर्पण में नील–नभ के स्वप्न में... आंसुओं की भाषा में मुस्कानों की मोती में मेरे मन की प्रीत में गाने लगें शहनाई के सौ–सौ राग सातों स्वर्ग न्यौछावर हो साथ मेरे चाँद–सितारे हो इस वसंत कुछ ऐसा हो, स्वप्न सब साकार हो ।

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