काव्य और गजल क्षेत्र से जुड़ी शख्सियत द्वारा काठमाण्डू मे महफिले गजल
काठमाण्डू,१३ दिसम्बर । अन्तर्राष्ट्रीय नेपाली साहित्य परिषद के बैनर तले हर महीने के अन्तिम में महफिल सजती है और इसका हिस्सा बनते है काव्य और गजल क्षेत्र से जुड़ी शख्सियत । आज दिनांक १३ दिसम्बर को यह महफिल सजी जानेमाने गजलकार डा. राणा के आवास पर जिसमें कई जानीमानी शख्सियतों ने शिरकत की । डा. राणा श्री राधेश्याम लेकाली, श्री कैलाश सिंह ठकुरी, गजलकार ज्ञानु वाकर, इमतियाज वफा,सनतकुमार वस्ति,चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े नवोदित गजलकार डा. टीकाराम भटराई, मोबिन खान,डा. सुबोध, सरु सुवेदी, डा. श्वेता दीप्ति आदि कई गजलप्रेमियों की हिस्सेदारी इस महफिल में थी । 
महफिल की शुरुआत डा. राणा के गजल से हुई—अपने ही गीत मुझे बेगाने लगते हैं….। और फिर शमा तो बंधता ही चला गया सबने अपनी गजल, गीत और कविता को सुनाया और एक सम्मोहक फिजा को तैयार किया । गीत और गजल किसे अच्छा नहीं लगता ? ये वो विधा है जो पत्थरों में भी जान डाल दे । भावनाएँ हम सबमें होती हैं । कुछ इन्हें शब्दों में बाँधने का हुनर रखते हैं और कुछ की सोच अनकही ही रह जाती है । पर जब सामने वही शब्द, वही अनुभूति कोई बयाँ कर रहा होता है तो हर दिल उन शब्दों को जीता है और वह यह महसूस करता है कि दास्तान उसकी ही है और यहीं गीतकार या गजलकार या फिर कवि सफल हो जाता है । महफिल की दास्तां कुछ ऐसी ही थी कि हर कहने वाला या हर सुनने वाला, बयाँ की गई हर पंक्ति में खुद को पा रहा था । आज के व्यस्त जीवन में ऐसी
महफिलें निसन्देह सुकून देती है ।


