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नेपाल में गैर–सरकारी संस्था की स्थिति : श्यामानन्द सुमन

Shymanand Suman
 

हिमालिनी, अंक जनवरी 2019 | किसी भी देश की आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए उस देश के गैर सरकारी संस्था सरकार के लिए एक सहयोगी, सहयात्री एवं साझेदार के रूप में माना जाता है । इसीतरह नेपाल में भी राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय क्षेत्रों में गैर सरकारी संस्था के द्वारा खेले गए भूमिका, महत्वपूर्ण एवं गरिमामय रहा है । देश के सभी क्षेत्रों और सभी विषयों में सरकार की पहुँच समान रूप से नहीं हो सकती है । अतः ऐसी स्थिति में गैर सरकारी संस्था, सामुदायिक संस्था और यहां तक कि जागरुक नागरिक समाज की क्रियाशीलता और भूमिका अत्यन्त आवश्यक हो जाता है । नेपाल के सन्दर्भ में देखा जाए तो माओवादी सशस्त्र युद्ध के समय और लोकतान्त्रिक जनआन्दोलन के समय में भी गैर सरकारी क्षेत्र की भूमिका सराहनीय ही रही है । नेपाल सरकार ने भी राष्ट्र की आर्थिक, सामाजिक विकास के ढाँचे में गैर सरकारी संस्था को सहयोगी के भूमिका में रखा है । इसी मान्यता को आत्मसात करते हुए नेपाल के संविधान २०७२ भाग ४ के राज्य के निर्देशक सिद्धान्त, नीति तथा दायित्व संबंधी धारा ५० के उपदफा ३ में उल्लेख किया गया है कि ‘सार्वजनिक, निजी तथा सहकारी क्षेत्र की सहभागिता तथा विकास मार्फत उपलब्ध साधन तथा स्रोत के अधिकतम परिचालन द्वारा तीव्र आर्थिक विकास’करना राज्य का आर्थिक–सामाजिक उद्देश्य होगा । इससे पहले अन्तरिम संविधान में भी गैर–सरकारी संस्था को विकास का साझेदार के प में स्वीकार कर धारा ३५ (१९) के अन्तर्गत देश में स्थापना हुए संस्थाओं के संचालन और व्यवस्थापन के लिए राज्य को विशेष नीति अवलम्बन करने की बात कही गई । यहां तक कि २०६४ साल की त्रिवर्षीय अन्तरिम योजना में भी देश की सामाजिक विकास में गैर–सरकारी संस्था की भूमिका को प्रभावकारी बनाने के लिए दीर्घकालीन सोंच और उसी के हिसाब से संचालन हेतु रणनीति तथा कार्यनीति की व्यवस्था की बात कही गई । इस तरह नेपाल के आधुनिक इतिहास में गैर सरकारी संस्था को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है ।
गैर सरकारी संस्थाओं के नियमन के लिए समाज कल्याण परिषद् काफी समय से काम कर रहा है । परिषद् के आँकड़ों के हिसाब से २०३३–०३४ से लेकर २०७३–०७४ तक के दर्ता हुए गैर सरकारी संस्था की संख्या ४६१३८ है और यह देश के सभी जिलों में दर्ता किया हुआ का समष्टिगत तथ्यांक है ।
इसीतरह अन्तर्राष्ट्रीय गैर सरकारी संस्थाओं की संख्या २३९ अभी दर्ता में अध्यावधिक देखने में आता है । यह संसार के विभिन्न देशों से आए आर्थिक स्रोतों से चलता है । ऐसे संस्थाओं के कन्ट्री डाइरेक्टर ज्यादातर नेपाली नागरिक ही होते हैं और कुछ विदेशी नागरिक भी सरकारी अनुमति से उस पद पर नियुक्त होते हैं । ये संस्थाएं नेपाल के विभिन्न विषयों में काम करते हैं । खासकर जहां सरकारी निकाय उपस्थिति नहीं होते हैं, और ऐसे जगहों और कामों में गैर सरकारी संस्था और अन्तर्राष्ट्रीय गैर सरकारी संस्था अपने को उपस्थित करते हैं । आर्थिक रूप से भी सरकारी निकाय हर सामाजिक कामों में हाथ नहीं बटा सकती है, वहां यह गैर सरकारी संस्था काम करती है । देश में रोजगारी सृजना का काम भी करती है और आर्थिक स्रोत–साधन भी देशी–विदेशी गैर सरकारी संस्था से मिलती है । अगर अन्तर्राष्ट्रीय गैर सरकारी संस्था को देखा जाए तो सब से ज्यादा युएसए से और सबसे कम ब्राजील, थाइल्याण्ड और कुछ देश इसमें सम्मिलित होते हैं । (विस्तृत लिस्ट बॉक्स में देख सकते हैं । )
गैर सरकारी संस्था और अन्तर्राष्ट्रीय गैर सरकारी संस्था की संख्या देखी जाए तो लगता है नेपाल के अभी तक विकसित राष्ट्रों की श्रेणी में आ जाना था । पर देश की हालात तो किसी से छिपी नहीं है । अगर देश में आनेवाले रेमिटैन्स को छोड़ दिया जाए तो देश एक तरह से ‘असफल राष्ट्र’ के रूप में मुंह बांये खड़ा दिखता है । यह तो आर्थिक दृष्टि से दिखता है । अगर सामाजिक विकास की दृष्टि से देखा जाए तो देश जहां का तहां खड़ा मिलता है । सामाजिक असमानता, आर्थिक, सामाजिक वितरण प्रणाली, अशिक्षा, जातिगत, भाषागत, धर्मगत, वर्गगत, लिंगगत आदि सभी मापदण्ड में देश अभी भी पीछे पड़ा हुआ है । राजनीतिक नैतिक मूल्य–मान्यता तो अधोगति में है ही । उपरोक्त सभी क्षेत्रों में गैर–सरकारी संस्था, और अन्तर्राष्ट्रीय गैर सरकारी संस्था काम कर रही है । पर इनका प्रभाव असरदार नहीं दिखता है । सरकार, आम नागरिक और गैर सरकारी संस्था एक दूसरे के प्रति व्यवहार में असन्तोष ही प्रकट करते हैं । खासकर गैर सरकारी संस्था बडेÞ उद्देश्य से और सम्भावनाओं को लेकर दर्ता किया जाता है पर ज्यादातर कागजी घोड़ा ही दौड़ता है । इसके भी कई कारण हैं । काम करने की प्रवृत्ति कम, आर्थिक स्रोत में पारदर्शिता की कमी, परिवारवाद, समूहवाद का बोलवाला, राजनीतिक संबंध और उसके प्रभाव, शहर केन्द्रीत कार्यक्रम, गोष्टी, सेमिनार में अधिक खर्च, जनता के बीच (घर–दैलो) सेवा संचालन में अपेक्षाकृत कमी, कार्यक्रमों की पारदर्शिता में कमी आदि जनता की शिकायत में आती है । उपरोक्त बातें कोई कपोलकल्पित नहीं, बल्कि असली शिकायत के रूप में आता है । इसी सिक्का के दूसरी तरफ अगर गैसस की बात सुने तो उनके कहने में आता है कि गैर सरकारी संस्था को अपने स्रोत–साधन का प्रयोग स्वतन्त्रता पूर्वक करने नहीं दिया जाता है । सरकारी और राजनीतिक हस्तक्षेप होता है । उनका कहना है कि गैर सरकारी संस्था के कार्य क्षेत्र को सरकार के द्वारा सीमित नहीं किया जाना चाहिए । साथ ही पंजीकरण और नवीकरण की प्रक्रिया भी कठिनाईपूर्ण है और सरकारी निकायों से जितना सहयोग और सहुलियत मिलनी चाहिए, वह नहीं मिल पाती है ।
उपरोक्त बातों में कुछ हद तक दोनों पक्ष सही दिखते हैं । वास्तव में गैर सरकारी संस्था को विकास के साझेदार के रूप में मान्यता तो मिली हुई है, पर इस कार्यक्रम को प्रभावकारी नहीं बनाया जा सका है । इस प्रणाली के अनुमगन, मूल्यांकन और सुशासन में वांछित सुधार की आवश्यकता दिखती है । कई स्थानों में तो कार्यक्रमों की पुनरावृत्ति और स्रोत–साधन का अपव्यय भी देखा जा सकता है । पता लगा है कि २० लाख रूपयां से ज्यादा रकम के गैर सरकारी संस्था का समाज कल्याण परिषद् द्वारा अनुमगन नहीं होता है । वैसे भी गैर सरकारी संस्था दो जगहों से पंजीकृत होता है । एक जिला प्रशासन कार्यालय से और दूसरा कंपनी राजिष्ट्रार के कार्यालय से । कुछ नाफामूलक होते हैं और कुछ नाफामूलक नहीं होते । समाज कल्याण परिषद् का भी कहना है कि परिषद् के वर्तमान व्युरोक्रेसी को देखते हुए देश के ७७ जिलों में गैर सरकारी संस्थाओं का अनुगमन करना कठिन ही नहीं, बल्कि असम्भव है । ५० हजार संस्थाओं का, जो देश भर में फैला हुआ है, उनको डिटेल में देखने की सम्भावना कम रहती है । अतः परिषद् के कर्मचारीतन्त्र को विस्तार करने की अन्त्यन्त आवश्यकता है । और तभी नियमित रूप से गैसस पर नजर रखा जा सकता है । उनका कहना है कि गैसस संबंधी कानून में भी कमी है । अतः समय में ही आवश्यकता अनुसार संशोधन कर या नव निर्माण किया जाना चाहिए ।
संघीय गणतान्त्रिक स्वरूप के नया नेपाल के सन्तुलित आर्थिक–सामाजिक विकास में गैर सरकारी संस्था की भूमिका अभी और महत्वपूर्ण हो गई है । विगत के कुछ वर्षों में राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय गैर सरकारी संस्थाओं की संख्या, विषयगत एवं क्षेत्रगत संलगनता और कार्य क्षमता की वृद्धि में आशातीत वृद्धि हुई है । सरकार द्वारा गैर सरकारी संस्था को विकास के साझेदार के रूप में प्रवद्र्धन कर और उसके क्रियाकलाप को राष्ट्रीय प्राथमिकता के क्षेत्र में निदृष्ट कर सकने पर महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल किया जा सकता है । पर इसके लिए राज्य द्वारा उपर्युक्त संयन्त्र का निर्माण कर दीर्घकालीन व्यवस्था मिलाना आवश्यक है । इसके लिए वर्तमान समाज कल्याण परिषद् की पुनर्संरचना और अन्य अनुगमन÷मूल्यांकन संयन्त्र तैयार करना होगा । ऐसा होने पर गैर सरकारी संस्था की भूमिका सुदृढ, मर्यादित और पारदर्शी होगी और देश की आर्थिक–सामाजिक रूपान्तरण में समावेशी, न्यायपूर्ण एवं समृद्ध नेपाल निर्माण में एक मैत्रीपूर्ण और विश्वासी साझेदार के रूप में स्थापित होगी । इस सन्दर्भ में पेरिस घोषणपत्र के हिसाब से गैर सरकारी संस्था कार्यक्रम को राष्ट्रीय प्राथमिकता के क्षेत्र में निदृष्ट करना चाहिए । साथ ही संबंधित सरकारी निकाय और गैर सरकारी संस्था के छाता संगठन, एनजीओ फेडरेसन को मिलकर साझा संयन्त्र भी निर्माण किया जा सकता है । इसके साथ ही गैर सरकारी संस्था के क्रियाकलाप की पारदर्शिता, जवाफदेहिता तथा जनता की प्रत्यक्ष सहभागिता बढ़ानेवाली नीति भी अवलम्बन करना होगा । सरकारी संयन्त्र के पूरक के रूप में दुर्गम ग्रामिण क्षेत्र तथा समुदाय खासकर गरीबी और अशिक्षा के मार में पड़े हुए महिला, मधेशी, आदिवासी, जनजाति, दलित, अपांग, जेष्ठ नागरिक आदि के जीवनस्तर को उठाने और जीविका प्रवद्र्धन के लिए विशेष क्रियाशीलता में भी गैर सरकारी संस्था की भूमिका अहम् हो सकती है ।

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पंजीकृत गैर सरकारी संस्था
सि. प्रदेश जिला संख्या गैसस संख्या
१. प्रदेश नं. १ १४ ३८०७
२. प्रदेश नं. २ ८ ६४३३
३. प्रदेश नं. ३ १३ २३९००
४. गण्डकी प्रदेश ११ ३५६२
५. प्रदेश नं.५ १२ ३६५८
६. कर्णाली प्रदेश १० १९२३
७. सुदूरपश्चिमाञ्चल ९ २८५५
कुल ४६१३८

विषयगत दृष्टिकोण से कार्यरत गैर सरकारी संस्था
सि.नं. विषय संख्या
१. समुदायिक तथा ग्रामीण विकास २९५००
२. महिला विकास ३३५१
३. युवा विकास ५९३८
४. स्वास्थ्य सेवा १११२
५. बालबालिका विकास १२९१
६. वातावरण सुरक्षा १५६९
७. शैक्षिक विकास ७१७
८. नैतिक विकास १६८८
९. एड्स तथा यौन रोग नियन्त्रण ११३
१०. अशक्त तथा अपंग सेवा ८५९
जमा ४६१३८

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नेपाल में कार्यरत अन्तर्राष्ट्रीय गैर सरकारी संस्था
देश संख्या देश संख्या
१. युएसए ७३
२. युके ३६
३. जर्मनी १७
४. फ्रान्स ११
५. इटली ११
६. जापान ११
७. स्वीटजरल्याण्ड १०
८. नेदरल्याण्ड ८
९. अष्ट्रेलिया ७
१०. भारत ७
११. डेनमार्क ६
१२. कोरिया ६
१३. क्यानाडा ५
१४. आयरल्याण्ड ४
१५. बेल्जियम ४
१६. चाइना ३
१७. नर्वे ३
१८. इजरायल २
१९. फिनल्याण्ड २
२०. स्पेन २
२१. स्वीडेन २
२२. चेक रिपब्लिक २
२३. ब्राजिल १
२४. न्यूजील्याण्ड १
२५. लक्जेम्बर १
२६. कतार १
२७. साउदी अरेबिया १

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