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संघीयता का आयु निर्धारणकर्ता प्रदेश नं २ ही है, सम्भव है प्रदेश–२ का विकास ! : चन्दा चौधरी

हिमालिनी अंक जुन २०१९ |प्रदेश नं २ में नेपाल की कुल जनसंख्या का २०.४५ प्रतिशत लोग रहते है । और कुल भुगोल का ५.७४५ प्रतिशत प्रदेश नम्बर २ है । इस प्रदेश मे ५ वर्ष और उससे ऊपर के उम्र समूह की साक्षरता दर राष्ट्रीय स्तर में सबसे कम अर्थात ४९.५४५ और महिला की साक्षरता दर ३८.८८५ है । वैदेशिक रोजगार में जाने वाले कुल श्रमिक संख्या का २५.१५ प्रतिशत प्रदेश २ का ही है । नेपाल राष्ट्र बैंक द्वारा किए गए सर्वेक्षण के अनुसार आ ।व २०७४÷०७५ में इस प्रदेश की प्रतिव्यक्ति आय अमेरिकी डलर ७९९ है, जो की राष्ट्रीय आय औसत अमेरिकी डालर १००४ से बहुत ही कम है । प्रदेश का गरीबी दर भी निन्दनीय है । वैसे ही मानव विकास सुचकांक के आधार पर देखा जाय तो इस प्रदेश में रहे ८ जिलो मे महोत्तरी का सुचकांक ०.३८८ और रौतहट का ०.३८६ है । यह आँकड़ा राष्ट्रीय औसत की तुलना मे अधिक न्यून है । अतः बहुत जरुरत है कि इस प्रदेश की समृद्धि के लिए ईमानदारी से काम किया जाय ।

बार–बार यह कहने की आवश्यकता नही है कि संघीयता का आयु निर्धारणकर्ता प्रदेश नं २ है । आज नेपाल मे सात प्रान्त है । परंतु सबकी निगाहें अगर किसी प्रदेश पर टिकी है तो वह है प्रदेश नम्बर २. देश को संघीय संरचना मे ले जाने का उदेश्य था विकेन्द्रीकरण । यह सम्भव भी हुआ । अलग बात है कि जिस तरह का संघीय संरचना अपनाया गया है उसमें आमूल परिवर्तन की कल्पना भी नही की जा सकती है । हमे अभी आगे तक लड़ना है, अधिकार और आवश्यक साधन प्राप्त करने के लिए । परंतु अभी जो संरचना है उस को बहुत ही बारीकी से लागु करना होगा हमें । आम जनता को यह पता नही है कि क्या राजनीतिक और संवैधानिक जटिलता है संघीयता के मर्मानुरूप लोगाें को सेवा करने के लिए । उन्हें बस यह मालूम है कि देश में संघीयता है और हमे पहले अच्छा विकास और सुविधा प्राप्त हो सकती है । अगर ऐसा नहीं हुआ तो संघीयता विरोधी ताकतों को ही फायदा मिलने की सुनिश्चितता है ।

जैसै कि मैंने प्रारम्भ कुछ आँकड़ों को दर्साया है उससे यही पता चलता है कि अस्तित्व में रहे सात प्रदेश की तुलना में प्रदेश २ कई मायनों में पीछे है । प्रदेश २ के आठ जिले ऐसे हैं जहाँ से संघीयता के आन्दोलन का शंखनाद हुआ था । यह इस चीज को भी बयां करता है कि राजनीतिक जनचेतना के हिसाब से यह भूमि अधिक उर्बर है । परंतु इसकी यह व्याख्या नही की जानी चाहिए कि प्रदेश २ के अलावा दूसरे प्रदेश राजनीतिक चेतना के हिसाब से दखल नही रखते ।

वैसे समृद्धि और विकास कभी भी सापेक्षित ही होता है । इसका निरपेक्षिकरण भी नहीं किया जा सकता है । किसी भी प्रदेश वा देश का विकास हुआ तभी माना जा सकता है जब वहाँ के आम लोगो की जीवनशैली मे तात्विक और दीर्घकालीन परिवर्तन आ जाए । प्रदेश २ नेपाल के पिछड़े प्रदेश की सुची में ही रखा गया है, सच्चाई भी यही है । क्या प्रदेश २ का विकास सम्भव है ? इस आलेख को मैने इसी बिषय के करीब रखने का प्रयास किया है । प्रदेश २ चुनौतियों से भरा हुआ प्रदेश है । आर्थिक चुनौती तो शिखर पर है । परंतु इच्छाशक्ति हो तो हम इस प्रदेश को आर्थिक प्रगति के पथ पर अवश्य ला सकते हंै । उसके लिए हमें सबसे पहले आर्थिक हिसाब से मायने रखने वाले कुछ आयाम को समझना होगा ।

कृषि इस प्रदेश का मुख्य आर्थिक आधारों में से एक है । कुल भूभाग को देखा जाय तो कृषि के लिए उपयोगी ५३५२.२ वर्ग किमी जमीन है । पेशागत हिसाब से इस प्रदेश की अहम पेशा कृषि ही है । रेमिट्यान्स को अलग कर दिया जाय तो अधिकतम लोगो के जीने का आधार भी कृषि है । परंतु कुल कृषि योग्य जमीन को देखा जाय तो बहुत कम संख्या मे खेती योग्य जमीन का प्रयोग किया जा रहा है । छोटे छोटे टुकडों में  कृषि का काम चल पा रहा है । लोग व्यवसायिक खेती नही कर पा रहे है । ऐसे मे प्रदेश सरकार को यथा सम्भव जमीनों का चक्लाबन्दी कर कृषको को जमीन मुहैया कराना चाहिए । वैसे ही, मधेश के मेरुदण्ड कहने वाली चुरे विनाश के कारण खेती योग्य जमीन बर्बाद हो रहा है उसे यथा सम्भव रोकना चाहिए । कृषि उत्पादन को व्यवसायीकरण करने के लिए कृषको के लिए बिशेष प्याकेज लाना होगा साथ ही जब तक कृषक खुश नही हो पाएंगे और उन्हें बजार नही मिल जाता है तब तक कृषि का रथ आगे नही बढ़ सकता । मिट्टी, मल और वाली संरक्षण सम्बन्धी प्रयोगशाला की स्थापना भी उतनी ही जरुरी है । गुणस्तरीय बीज तथा पौधा मुहैया कराना उचित होगा कृषको के लिए ।
वैसे तो प्रदेश सरकार और संघीय सरकार की तरफ से सहकारी का प्रावधान लाया गया है परंतु उसकी कार्यान्वयन पक्ष में हमे ध्यान देना चाहिए । गाँव एवं कसबो मे छोटे–छोटे बिखरे हुए रकमो काें जमा कर के आर्थिक कारोबार करके कुछ हदतक रोजगारी प्राप्त करने में सहुलियत प्राप्त की जा सकती है । इस माध्यम में आर्थिक अवस्था सिर्फ नही सुधारा जा सकता है अपितु आर्थिक बृद्धिदर बढ़ाने में भी सहकारी अहम भूमिका खेल सकती है । थोड़ा बचत करके बड़ी धनराशि निर्माण एवं स्वरोजगार श्रृजना करने मे मदत पहुँचाया जा सकता है जो की प्रदेश २ के लिए अति आवश्यक माना जा सकता है ।

अब बात करें प्रदेश के उद्योग की । देश के कुल औद्योगिक उत्पादन में प्रदेश २ का योगदान २४ प्रतिशत माना जा रहा है । रफ्तार गति में अगर आर्थिक बृद्धिदर हासिल करना है तो उद्योग विकास की बड़ी भुमिका होती है । बिरगंज, पथलैया जैसी जगह प्रदेश २ के औद्योगिक विकास के लिए अहम भूमिका बन सकती है । राष्ट्रीय औद्योगिक गणना २०६८÷०६९ को आधार माना जाए तो देश मे विद्यमान कुल उद्योग का १९.९ प्रतिशत उद्योग इसी प्रदेश में है । प्रचुर औद्योगिक सम्भावना रहने के बावजूद भी अगर प्रदेश का विकास नहीं हो पाया तो हमें आरोपित होने के लिए तैयार रहना पड़ सकता है । उद्योग को सहज और सुलभ बनाने के लिए प्रदेश सरकार को ठोस पहलकदमी लेने की आवश्यकता है । गौरतलब है कि उद्योग संचालन हेतु हमें विद्युत पर आश्रित होना पड़ रहा है । भन्सार के मामले में हमे आयातमुखी होना पड़ रहा है । खुली सीमा होने के कारण यह समस्या व्याप्त है । ऐसी परिस्थितियो से लड़ने के लिए हमें उद्योग संचालकों के लिए प्रदेश सरकार को विशेष व्यवस्था करना उचित होगा । खुली सीमा पर चौकन्ना रहने की आवश्यता होगी ताकि उद्योग से हुए उत्पादनों का बाजार नेपाल बन सके और उत्पादन को निर्यात किया जा सके । प्रदेश सरकार के तरफ से उद्योग संचालन के लिए गए वर्तमान निर्णय सराहनीय है ।
अब चर्चा करे पर्यटन व्यवसाय की । यह ऐसा व्यापार है जिसके माध्यम से कम से कम लागत मे ज्यादा मुनाफा प्राप्त किया जा सकता है । प्रदेश २ पर्यटन के हिसाब से सम्भावना से भरा हुआ प्रदेश है । प्रदेश के अस्थायी राजधानी जनकपुरधाम इसका शानदार उदाहरण है । जानकी मन्दिर और गंगा आरती ने पर्यटको को आकर्षित करता आ रहा है । परंतु प्रदेश २ के आठों जिले में धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन के सम्भावनाओ को संजोग रखा है । महोत्तरी के जलेश्वरनाथ महादेव का अपना बिशेषता हो या सप्तरी के छिन्नमस्ता एवं सखडा भगवती की एतिहासिकता हो । जब बात सांस्कृतिक पर्यटन की आती है तो हम सिम्रौणगढ को अनदेखा नही कर सकते हैं । आवश्यकता है तो प्रदेश सरकार की इच्छाशक्ति की । प्रदेश २ के पर्यटन सम्भावनाओ को एक प्रोफइल तैयार कर के उसको साझा करना चाहिए । सूचना संचार के इस एक्कीसवी सदी में प्रदेश २ के महत्वपुर्ण पर्यटन स्थलों के बारे में सोशल मीडिया के माध्यम से ही सही इसका अन्तराष्ट्रीयकरण करना अतिआवश्यक है । देखा जाय तो प्रदेश २ मे तीन  हवाई अड्डा उपलब्ध है । हिमाल और पहाड़ के भौगोलिक तुलना में प्रदेश २ बहुत ही ज्यादा सुगम है । हवाइ माध्यम, लेण्ड रुट का फायदा उठाया जा सकता है । आन्तरिक पर्यटन का प्रवर्धन करने मे कोई परेशानी भी नही होनी चाहिए । प्रदेश २  सरकार को अपनी अग्रसरता देखाते हुए ‘अन्तर प्रादेशिक पर्यटन नेटवकर्’ स्थापना करना चाहिए । और यह समय की भी आवश्यकता है ।
शिक्षा किसी भी देश का मेरुदण्ड माना जाता है । अगर प्रदेश शिक्षित नही हो पाया तो आन्दोलन की किसी भी उपलब्धि पर हम गर्व नही कर सकते हैं । प्रदेश २ की शिक्षावस्था बहुत ही नाजुक है । वैसे प्रदेश मे शैक्षिक संस्थानो की उतनी ज्यादा कमी नही है फिर भी प्रदेश सरकार को शिक्षा में निवेश करने की आवश्यकता है । शिक्षा जगत में कुछ ऐसा करके दिखाना चाहिए जिस से कि दूसरे प्रदेश से विद्यार्थी प्रदेश २ में पढ़ने के लिए आए । शिक्षा मे किया गया निवेश कभी भी घाटे में नहीं रहता है । प्रदेश के समग्र विकास के लिए शिक्षा जगत का निवेश फलदायी सिद्ध हो सकता है ।
उपर उल्लेखित पहलुओं को अगर प्रदेश सरकार गंभीरता से लेती है तो प्रदेश मे एक चरण का विकास देखा जा सकता है । स्थानीय सरकार से ज्यादा से ज्यादा अपने कन्फिडेन्स में ले कर काम करे तो और अर्थपूर्ण तरीके से बढ़ सकती है विकास की यात्रा । वैसे विकास एक अन्तहीन यात्रा है । प्रदेश २ सरकार के उपर और कई सारे उत्तरदायित्व भी है । भ्रष्टाचार रोकना और अधिकार की लड़ाई को आगे बढ़ाना । अधिकार की लड़ाइ को आगे बढ़ाने के लिए नैतिक हिसाब से मजबूत रहना अतिआवश्यक माना जाता है । अधिकार की लड़ाई के लिए हमे आमजनता मे जाना पड़ता है । और जनता के नजर मे अगर हम बेदाग हो कर जाते है तो उनका साथ और स्नेह हमे सदैव प्राप्त होने का सम्भावना जीवित रहता है ।

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