ईश्वर का वरदान : निधि भार्गव मानवी
ईश्वर का वरदान
बादलों के पार अपना स्वप्न
सा इक गाँव है।
ख्वाहिशें नभ को छुएँ फिर भी
ज़मीं पर पाँव है।
तात ने श्रम से किये थे कुछ
सितारे यूँ जमा।
मातु ने टाँके सितारे नेह
आँचल मन रमा।
नेह भाई का मिला जिससे
सबल बन मैं खड़ी
एक सच्ची सी सहेली है
बहन जिससे लड़ी।
ईश के वरदान सम मुझको
अनूठा घर मिला।
पूर्ण मातृत्व करने साथ
बच्चों का मिला।
यह जहां रोशन करूं कुछ
ख्वाब अरु अरमान से।
हो के’ नतमस्तक करूँ मैं
प्रार्थना भगवान से।
शब्द धागे जोड़ कर लिखना
मुझे सिखला दिया।
भावना का एक निर्झर इस
हृदय उपजा दिया।

गीता कालोनी
ईस्ट दिल्ली


