Thu. Oct 15th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें himalini-sahitya

जीवन में आनंद तुम्हीं से क्यों समझूँ वृंदावन क्या है: अयोध्यानाथ चौधरी

 

अयोध्यानाथ चौधरी

हिमालिनी, अंक- दिसंबर 2019 

कभी हम झुकते हैं
कभी तुम
कोई बुरा तो नहीं
हमेशा सर उठा के रखना
ना संभव, ना सुन्दर ।
झुकी हुई पलकें
झुका हुआ आसमां
फलों से झुकी हुई शाखाएं
फूलों से लदी–झुकी डालियां
झुककर शिष्टाचार प्रर्दशन करते लोग
प्रेम के आगोश में झुकते समर्पित वे
जरा सोचें एक पल के लिए
क्या बयां करते हैं, क्य ।..क्य ।..??
अहं का खो जाना
समान भाव से सम्मान प्रगट करना
मानवता के करुण धारा में विलय होना
विश्व–बन्धुत्व के आगे नतमस्तक होना
जाति–भेद–लिंग के दिवार को ढलते देखना
बिना झुके संभव है क्या ???

यह भी पढें   जनकपुरधाम के शक्ति पीठों में श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़

मैं क्या जानूँ सावन क्या है
ममता शर्मा आँचल
मैं क्या जानूँ सावन क्या है
प्रिय तुमसे मनभावन क्या है
सपनों में छिपकर आते हो
जाने क्या क्या कह जाते हो
नर्म–नर्म अहसासों में तुम
इससे सुखद बिछावन क्या है
मैं मछली तुम सागर जैसे
प्रीत भरी इक गागर जैसे
प्रश्न लिए नित भटक रहे थे
तुमसे समझा पावन क्या है
तुम मुरली की धुन हो प्रियतम
निधिवनऔर रास का संगम
जीवन में आनंद तुम्हीं से
क्यों समझूँ वृंदावन क्या है

यह भी पढें   दो दिवसीय अंतरप्रदेशीय मुख्यमंत्री सम्मेलन–2083 आज से विराटनगर में शुरू
अयोध्यानाथ चौधरी
जनकपुर

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may missed

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com