Mon. Jun 8th, 2026

विविध

अध्यात्म

 

पवजन्म का कर्म फल रवीन्द्र झा शंकर’:भगवान व्यास सभी जीवों की गति तथा भाषा को

कलियुग का प्रभाव

 

यन्नामधेयं प्रियमाण आतुरः पतन् स्खलन् वा विवशो गृणन् पुमान् । विमुत्कमार्गल उत्तमां गतिं प्राप्नोति यक्ष्यन्ति

विश्वरुपा माँ शक्तिदायिनी ५१ शक्तिपीठ की महिमा : श्वेता दीप्ति

 

विश्वरुपा मा“ शक्तिदायिनी ः ५१ शक्तिपीठ की महिमा देवी प्रपन्नर्तिहरे प्रसीद प्रसीद मातर्जगतो˜खिलस्य । प्रसीद

जीने की अभिलाषा

 

रवीन्द्र झा ँशंकर’:काल के झंझावात से पंखुडिÞयाँ वृक्षों से टूटकर गिर जाती हंै, फूल धूल

मनुष्य जीवन की राह

 

रवीन्द्र झा शंकर’:शास्त्रों में मनुष्य-शरीर परमात्मा की र्सवश्रेष्ठ कृति कही गई है । परन्तु अनेक

संगति का असर

 

गणेश कुमार लाल:पुराने जमाने में एक देश के राजा थे भैरव सिंह। उस राज्य में

You may missed