Wed. Jun 3rd, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

आज ऋषि पंचमी, महिलाओं के मासिक धर्म से जुड़ी है ऋषिपंचमी की कथा, जानिए इसका महत्तव

 

 

भाद्रपद महीने की शुक्ल पंचमी तिथि महिलाओं के लिए बेहद अहम मानी जाती है, जिसे ऋषि पंचमी  कहा जाता है. इस दिन सप्तऋषियों के पूजन के साथ कुछ समाजों में रक्षाबंधन का पर्व मनाने की परंपरा है. खासतौर पर महिलायें इस दिन उपवास भी करती है. जो जीवन में सारे सुख- वैभव व अंत समय में मुक्ति देने वाला माना जाता है. इसे लेकर भविष्य पुराण में एक कथा भी है, जो महिलाओं के मासिक धर्म से जुड़ी है. यहां आज वही कथा पंडित इंद्रमणि घनस्याल बता रहे हैं, जिसमें ही इस व्रत का महात्म्य भी छिपा है.

ऋषि पंचमी की कथा
सतयुग में विदर्भ नगरी में श्येनजित नाम के ऋषियों के समान राजा थे. जिनके राज में एक किसान सुमित्र व उसकी पत्नी जयश्री धर्म परायण जीवन जी रहे थे. जो वर्षा ऋतु में एक समय खेती के काम में जुटे थे. इसी दौरान जयश्री रजस्वला हो गई, पर इसका पता लगने पर भी उसने काम करना जारी रखा.

यह भी पढें   देश नशे में नहीं चलता : कैलाश महतो 

आयु पूरी होने के बाद जब दोनों पति- पत्नी की मौत हुई तो जयश्री को कुतिया और सुमित्र को रजस्वला के सम्पर्क में रहने से बैल की योनि मिली. चूंकि ऋतु दोष के अलावा दोनों का कोई दोष नहीं था, ऐसे मे उन्हें अपना पूर्व जन्म याद रहा. जिसके चलते कुतिया व बैल की योनियों में भी वे अपने घर में बेटे सुचित्र के यहां रहने लगे. सुचित्र भी धर्मात्मा था. जिसने एक बार अपने पिता के श्राद्ध पर ब्राम्हाणों को भोज पर आमंत्रित किया.

कुतिया को मारना शुरू किया
इसी दौरान जब उसकी स्त्री किसी काम से रसोई से बाहर गई तो पीछे से एक सांप ने रसोई की खीर के बर्तन में विष वमन कर दिया, जिसे कुतिया ने देख लिया. ऐसे में पुत्र को ब्रह्म हत्या के पाप से बचाने के लिए उसने भी उस बर्तन में मुंह डाल दिया.

यह भी पढें   सीमा विवाद को सुलझाने के लिए सरकार ब्रिटेन (इंग्लैंड) से भी बातचीत कर रही है : प्रधानमंत्री बालेन्द्र

जिसे देख सुचित्र की पत्नी चन्द्रवती ने गुस्से में चूल्हे से जलती लकड़ी निकाल कर कुतिया को मारना शुरू कर दिया और उसके लिए हमेशा रखने वाला जूठन भी उसे ना देकर बाहर फेंक दिया. इसके बाद नए सिरे से खाना बनाकर ब्राह्मणों को खिलाया. इसके बाद जब रात को भूख लगी तो कुतिया बिलखती हुई बैल बने पति के पास गई, जहां उसने दिन का सारा वृतांत बता दिया.

ऋषि पंचमी के व्रत का उपाय
तब बैल बना पति बोला कि हे भद्रे! तेरे पापों के कारण तो मैं भी इस योनि में हूं. बोझा ढ़ोते-ढ़ोते मेरी भी कमर टूट गई है. खेत में दिनभर हल में जुता रहने पर उसे भी पुत्र ने भोजन नहीं दिया. उसे मारा भी. इस तरह उसने मेरा श्राद्ध भी निष्फल कर दिया. दोनों ये बात कर रहे थे, तभी उनके पुत्र ने भी वहां पहुंचकर उनकी बात सुन ली, जिसके बाद पश्चाताप करते हुए उसने उन दोनों को भरपेट भोजन कराया और उनके दुख से दुखी होकर वन में चला गया. जहां जाकर उसने ऋषि- मुनियों से अपने माता व पिता की कुतिया व बैल योनि से छुटकारे की बात पूछी. तब सर्वतमा ऋषि ने पत्नी सहित ऋषि पंचमी के व्रत को उसका उपाय बताया.

यह भी पढें   भारत-नेपाल स्टार्टअप साझेदारी कार्यक्रम का दूसरा बैच शुरू, 25 नेपाली स्टार्टअप्स को भारत में मिलेगा प्रशिक्षण

उन्होंने कहा कि भाद्रपद महीने की शुक्ल पंचमी को मुख शुद्ध करके मध्याह्न में नदी के पवित्र जल में स्नान कर नए रेशमी कपड़े पहनकर अरूधन्ती सहित सप्तऋषियों का पूजन करना. इससे दोनों की मुक्ति हो जाएगी. विधि पूर्वक उसने ऋषि पंचमी का व्रत किया, जिसके पुण्य से उसके माता-पिता दोनों को पशु योनि से मुक्ति मिल गई. मान्यता है कि जो महिला श्रद्धापूर्वक ऋषि पंचमी का व्रत करती है, वह सारे भौतिक सुखों को प्राप्त कर अंत में मुक्ति को प्राप्त करती है.

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *