Sun. Oct 18th, 2026

कविता

लाशों पर लाशें बिछी, गली–गली विरान गांव, शहर, कस्बे सभी, लगते आज वुहान : रामनिवास मानव

 

दोहे सन्दर्भ कोरोना डॉ. रामनिवास ‘मानव’ गली–मुहल्ले चुप सभी, घर–दरवाजे बंद कोरोना का भूत ही,

बस प्रेम होना चाहती हूं,मुझे प्रिय है मेरा अकेला होना, मुझे प्रिय है तुम्हारा साथ अनंत : सरिता सारस

 

मैं गुलाम नहीं होना चाहती मैं गुलाम नहीं होना चाहती अपनी आदतों की अपने शौकों

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