Mon. Sep 21st, 2026

कविता

एक निवर्तमान रेमिट्यान्स मशीन का सरकार के नाम खत : विन्देश्वर_ठाकुर

 

विन्देश्वर_ठाकुर हेल्लो सरकार! विश्व के दो अक्षांस और देशान्तर में अवस्थित इस तीसरे देश से

दिल पर फिर से नश्तर रख कर। कोई याद पुरानी लिखना : दीपक गोस्वामी

 

स्वर्ग से सुन्दर,स्वपन सरीखा यह प्यारा नेपाल है। स्वर्ग से सुन्दर,स्वपन सरीखा यह प्यारा नेपाल

जब बाँट ही लिया दिल की ज़ागीर, तब क्यों पूछते हो दिल किधर गया : संजय कुमार सिंह

 

संवेदनशील कवि, उपन्यासकार, कहानीकार संजय कुमार सिंह की जिन्दगी से जुडी कुछ कविताएँ । पढें

अहम.. अपेक्षा.. उम्मीद… के सारे पत्ते पीले होकर गिरते देखती हूँ.. : सरिता सारस

 

प्रेम के गहरे क्षणों में मैं महसूस करती हूं तुम्हारा वृक्ष होना… अहम.. अपेक्षा.. उम्मीद…

अब भी करना छोड़दो पशुओं पर अत्याचार : कमला भंसाली जैन

 

“समय-सार” बने हम अभय-हिंसा के सेनानी, अपने से अपना कल्याण,प्रेषित हो जिन-वाणी। स्वयं-स्वयं का करे,अनुसंधान।

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