biratnagar कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट भूलाकर अपने शहीदों के बलिदान का आज भी हम लगे हैं सत्ता के कुचक्रो में : एस एन ठाकुर 6 years ago शायद हमेशा के लिये….. शायद हम ने नही सिखा है कुछ भी, शायदअपनी गलतियों से
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट कल हम हो ना हो जान किसने पाया है : डा.करुणा वन्त 6 years ago स्नेह बन्द खिड्कीके दरारोँ से आती रोशनी आस कुछ जगाती है सब ठीक हो जाएगा
biratnagar कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट श्याम गगन से बरसें, मोहन की रस बूँदें : जयप्रकाश अग्रवाल (चैनवाला) 6 years ago राधाष्टमी गीत श्याम गगन से बरसें, मोहन की रस बूँदें, लता पता से टपकें, सावन
इंडिया कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट पृथ्वीसिंह’ नित वृक्ष दें काम। डॉ कृष्णा आर्य नवण प्रणाम 6 years ago *डॉ. कृष्णा के कार्य महान* आज विश्व वृक्ष दिवस पर। कर्म कृष्णा आर्या का सुपर।।
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट खुद के लिए जी ले : अरुणा बाजेसरिया 6 years ago खुद के लिए जीले थाेडा जी ले,अपने लिए , कुछ मन का करले पचपन कटी
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट ज़िम्मेदारी की भट्टी में : कल्याण सिंह शेखावत 6 years ago ज़िम्मेदारी की भट्टी में कंधों पर अपनों के सपने, दिल में गहरे दर्द छिपाए, निकला
biratnagar breaking कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट चर्चा में अनिता सोनी द्वारा रचित राष्ट्रीयगीत ” कति राम्राे कति प्याराे, नेपाल देश हाम्राे” 6 years ago माला मिश्रा बिराटनगर । नेपालके प्रतिष्ठित घराने की अनिता साेनी द्वारा रचित राष्ट्रिय गीत ”
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट आओ सखी आओ आ गई है तीज कर लो श्रृंगार जी भर के आज : रंजु गुप्ता 6 years ago आ गई है तीज रंजु गुप्ता आओ सखी आओ आ गई है तीज कर लो
siraha-lahan कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट कोरोना से जीत अगर हासिल कर भी ले आने वाली बड़ी आफ़त से कैसे बच पाये ! : किशोरी शारदा 6 years ago कोरोना संकट (ग़रीब बच्चों का भविष्य??) इस व्यथा का कैसे वर्णन करूँ मैं कैसे संकट
biratnagar कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट सादा जीवन उच्च विचार, मानव जीवन का श्रृंगार : कमला भंसाली जैन 6 years ago अणुव्रत चेतना दिवस पर जीवन में अणुव्रत अपनाएं, नैतिक, निष्ठा को पनपाएँ,नशा मुक्त अभियान चलाएं
biratnagar कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट अब लिखो नई कहानी : श्यामानन्द ठाकुर 6 years ago मैं जाति नही सिर्फ धर्म हूँ मैं सीधा सादा कर्म हूँ ।। मैं शीतल हूँ
biratnagar कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट पुरुषोत्तम अनासक्त -कृष्ण हैं, अव्यक्त में वे व्यक्त -कृष्ण हैं : लक्ष्मण नेवटिया 6 years ago *_” ईश्वर: परम: कृष्ण:”_* सर्वेश्वर सर्वशक्तिमान् -कृष्ण हैं, रासेश्वर रसिकवान् -कृष्ण हैं, शतत दिव्यतम ज्ञान
biratnagar कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट ये कैसा प्रेम ??? : निशा अग्रवाल 6 years ago ये कैसा प्रेम??? यौवन सरिता में उतरे मनचाहे रूप मर्दन अधिकार समझ पीकर मेरी अधर
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट कितनी बड़ी है धरती मां हमारी , और कितनी छोटे हैं हम : मनीषा मारू 6 years ago नेपाल भारत मैत्री कितनी बड़ी है धरती मां हमारी , और कितनी छोटे हैं हम।
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट एक हाथ है भारत मेरा, दूसरा हाथ नेपाल है : अजयकुमार झा 6 years ago इस वसुंधरा के दिव्य भूखण्ड ‘भारत’ के 74 वाँ स्वतंत्रता दिवस के पुनीत अवसर पर
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट वो जागे रहे , हम सोए रहे : इंदु तोदी 6 years ago “वीर शहीद” वो जागे रहे , हम सोए रहे आराम से इत्मीनान से ! हम
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट इस कोरोना काल से , अब तो मुक्ति दिलाओ : मंजू उपाध्याय 6 years ago अब तो मुक्ति दिलाओ कोरोना के बीच झूलती जिंदगी हे ईश्वर, ये कैसा खेल रचाया
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट ओह ! राहत गए , हम आहत हुए (एक श्रद्धांजलि) : सुरेन्द्र लाभ 6 years ago श्रद्धांजलि ओह ! राहत गए , हम आहत हुए । पता नहीं क्या थे, एक
biratnagar कविता धर्म संस्कृति साहित्य हिमालिनी अपडेट ओ गिरधारी सुन बनवारी बतिया सांची मोरी : निशा अग्रवाल 6 years ago 1 प्रेम निमंत्रण मेरे अधरों का मौन निमंत्रण स्वीकार करो मनभावन आ जाओ बुला रहा
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट जन्म दिन मोहन का : जय प्रकाश अग्रवाल 6 years ago *जन्म दिन मोहन का* कैसी मस्ती छायी, सबके तन में- मन में, जन्म दिन मोहन
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट आज है पूर्णिमा का संयोग, बरसने दो अमृत धरा पर, मत करो मेरा मार्ग अवरुद्ध : अंशु झा 6 years ago पूर्णिमा का चांद अंशु झा पूर्णिमा के चांद को, हमने देखा झरोखों से, चांदनी बिखरते
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट शीश चढा दी इस मिट्टी पर : सुरेन्द्र लाभ 6 years ago परीक्षा जितना दे दो तुम, पास कभी क्या हो जाओगे ? , शीश चढा दी
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट पानी (कविता) : वसन्त लोहनी 6 years ago पनियां सावन में पानी गिरे तो तकलीफें आपको होती है आपकी शिकायतें बढती बाहर निकल
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट हिमालिनी विशेष अब कलम स्मृतियाँ नहीं स्वप्न लिखेगी फूल,पर्वत और नदी लिखेगी : नंदा पाण्डेय 6 years ago मेरी कविता नंदा पाण्डेय –––———— अब नहीं भटकना है मन की पगडंडियों पर दुख के
biratnagar कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट राम को अन्तरमन में भी बिठलाना है : इन्दु तोदी 6 years ago *राम को अन्तरमन में भी बिठलाना है* लो बड़े यत्न से किया स्थापित निज भुवन
कविता धर्म संस्कृति साहित्य हिमालिनी अपडेट हिमालिनी पत्रिका गूंज रही चहुँदिश जयकार,फहरा रही धर्म ध्वजा आज,तेरी जय हो! जय हो!जय हो : बसन्त चौधरी 6 years ago हे! रघुनन्दन हे प्रभुवर! जगत के रघुनंदन आदर्श हे! श्री राम दया के सागर, कौशलेंद्र,
कविता धर्म संस्कृति साहित्य हिमालिनी अपडेट मेरे प्यारे राम ! हर वनवास को काट राम निज घर आए है : प्रियंका पेड़ीवाल अग्रवाल 6 years ago सत्तर वर्ष अंतराल पश्चात, आज तुझे तेरा आवास मिला। मन करता यूं निज पग घूंघरु,बांध
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट रक्षासूत्र : कवि दिनेश सिंह सेंगर 6 years ago रक्षासूत्र (१) आज हमारे घर में देखो, प्यारी बहिना आई है भाई का अभिनन्दन करने,
कविता धर्म संस्कृति साहित्य हिमालिनी अपडेट हिमालिनी विशेष मन से मन का मेल ही राखी का सन्देश : आरती अशेष 6 years ago सावन लाया मेघ संग बारिश का उपहार । तीज, कजलियां साथ में राखी का त्यौहार
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट रक्षा की सौगंध लेता भ्राता, भाई बहन सा, न दूजा नाता : उषा चैनवाला 6 years ago *रक्षाबन्धन* राखी तो अद्भुत पावन त्यौहार भाई के लिये करे दुआ बहन, भाई भी रक्षा
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट हिमालिनी विशेष चमन के फूलों से चुरा लें उनकी रंगीनियां : डॉ• मुक्ता 6 years ago खुशी खुशी! मेरी सखी बड़े नाज़ो-अंदाज़ से पली-बढ़ी रंगीन मिज़ाज जहां रुख करती ख़ुशियों के
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट रखना मान इस राखी की : स्मृति श्रीवास्तव 6 years ago रखना मान इस राखी की बँधवाना जब तुम राखी भैया, अपनी सूनी कलाई पे, वचन
biratnagar कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट ऐसे मनाए राखी पूनम : कमला भंसाली जैन 6 years ago ऐसे मनाए राखी पूनम रक्षाबंधन का त्यौहार । दृढ़ संकल्प का आधार । इस बन्धन
कविता व्यक्तित्व और कृतित्व साहित्य हिमालिनी अपडेट मुंशी प्रेमचन्द जयंती पर : दो बैलो की जोड़ी से लमही बन गई महान ! 6 years ago 31 जुलाई डॉ श्रीगोपाल नारसन एडवोकेट अलगू,धनिया,होरी याद आ गया गोदान दो बैलो की जोड़ी
कविता साहित्य हे देव, महादेव,तुम ही सूर्य, न उदय न अस्त, तुम अर्धेश्वर , तुम ही अहर्त : तूलिका 6 years ago ‘एक ओंकार’ हे देव, महादेव, न आदि न अंत, तुम आकाश, तुम ही पूर्णेश्वर,
biratnagar कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट ए खुद गर्ज-यों निहाल न करते : लक्ष्मण नेवटिया 6 years ago उस अदृष्य के प्रति *ए खुद गर्ज-यों निहाल न करते* हम तुमसे कभी , सवाल
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट मानस के तुलसी : अजय कुमार झा 6 years ago तुलसी जयंती 2020 जुलाई 27 सोमबार मानस के तुलसी जो ज्ञान के भण्डार भयो, वेद
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट नवजात के नाम पाती : अलका ‘सोनी’ 6 years ago नवजात के नाम पाती तुम्हारा आना महज एक ‘जन्म’ नहीं था एक माँ ने भी
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट नहीं करना कोई बंटवारा मेरे भारत और नेपाल का : डॉ कृष्णा कुमारी आर्या 6 years ago भारत और पड़ोसी देश नेपाल के सम्बन्धों पर आज के संदर्भ में काव्य रचना लेकिन
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट भाग करोना जा, जगको नहीं सता : कल्याण सिंह शेखावत 6 years ago *भाग करोना जा।* खुले हुए मुॅह कभी न डोलें, ढांपो मास्क आवरण से। बार-बार सेनेटाइज
biratnagar janakpur कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट मैंने वि.पी. को देखा है : अजय कुमार 6 years ago * दिव्या कृष्ण के गोद में, खेल रहे विश्वेश्वर प्यारे थें। नन्हें पाँव से निर्वाषित
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट ओड़कर सनातन तन को कहाँ तक जाओगे : राजीव डोगरा ‘विमल 6 years ago कालकूट ओड़कर सनातन तन को कहाँ तक जाओगे, मिट जाए सब भ्रम तो एक दिन
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट साथ चलने वाला हमसफ़र कोई और होगा बस तुम नहीं होगे : अमित डोगरा 6 years ago वक्त , वक्त बदलेगा, सब कुछ बदल जाएगा, आज तेरे साथ हूं, फिर तेरे सामने
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट .. भूख बनाती मनुष्य को दयनीय-क्रूर-बेईमान : उषा चैनवाला 6 years ago *भूख* यह भूख ही है, जो बनाती इंसान को इंसान । या फिर बना देती
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट चराचर में विराजमान, घट घट वासी हे राम – जय श्रीराम : वसन्त लोहनी 6 years ago जय श्रीराम अपने मन का बादशाह खुद बनकर जो जिए हैं वह दूसरे को
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट हिमालिनी विशेष तुम बसन्त तो नहीं हो फिर कैसे/ तुम्हारे आने से.. यूँ बदल जाता है इस मन का मौसम : आरती अशेष 6 years ago आरती अशेष जी की कविताओं पर एक सुन्दर और भावपूर्ण समीक्षा शब्दों और अभिवयक्ति कला
biratnagar कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट न होगी राह-ए-ज़िंदगी हमवार, डर है कहीं डूब न जाउँ मझधार ? लक्ष्मण नेवटिया 6 years ago अब भी हुई देर तो आना उनका उम्मीदों से मेरी आँखों में खडी करता है
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट मैं नारी दुष्टों की बला हूँ मैं, भूल से भी ना कहना अबला हूँ मैं : अरूणा बाजेसरिया 6 years ago मै छू सकती हूँ आसमा मै छू सकती हूँ आसमा सिर्फ माैके की तलाश है।
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट हिमालिनी विशेष परजन्या सभ्यता के इन खण्डहरों में अब कहीं नहीं बहती : संजय कुमार सिंंह 6 years ago दिल के कोरों को छूकर गुजरती संजय सिंह की कविताओं से होकर गुजरना
biratnagar कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट मैं नया नेपाल का राष्ट्रवादी : एस. एन. ठाकुर 6 years ago मैं नया नेपाल का राष्ट्रवादी….. रोटी कपड़ा और मकान सब ब्यापरिक सामान भात दाल तरकारी
biratnagar कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट जल न जाऊँ बस विरह अग्नि में मै आज, अब के सावन में : इन्दु तोदी , 6 years ago ” अब के सावन में “” रिम झिम पड़ी जो सावन की फुहार, बढ
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट मैं सागर हूं, मैं खुद की शरहदें जानता हूं.. : नन्द सारस्वत स्वदेशी 6 years ago —-मैं सागर हूं—- मैं सागर हूं,मैं खुद की शरहदें जानता हूं.. अपनी मौज में बहता
कविता साहित्य अब ढूंढो एक प्रेम का नगर जहां न घृणा हो, न हो द्वेष, न कपट हो, न कोई क्लेश, : अंशु झा 6 years ago रे पंछी अब ढूंढो, एक प्रेम का नगर, जहां न घृणा हो, न हो द्वेष,
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट वतन के वास्ते : स्मृति श्रीवास्तव 6 years ago वतन के वास्ते एक दीपक जल रहा, देखो वतन के वास्ते। एक ही मंजिल सपहर
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट वही तो शिक्षक कहलाता है : एस एस डोगरा 6 years ago वही तो शिक्षक कहलाता है हम सब के जीवन में जो भी हमें कुछ
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट हिमालिनी विशेष देश के अभिमान हैं ये, देश के स्वाभिमान हैं ये, इनसे है देश की शान, सलाम है उन वीर जवानों को 6 years ago सलाम वीरो कोे रंजु गुप्ता सलाम उन वीरों को जिनके अदम्य साहस पर अभिमान करते
biratnagar कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट क्या खूब लगती हो…. “योग करो निरोग रहो” : कमला भंसाली जैन 6 years ago कविता,राग-:क्या खूब लगती हो…. “योग करो निरोग रहो” योगासन करने से सारे सुख मिलते हैं,
biratnagar कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट देश हमारा सिसक रहा है इसे कब तक रोने देंगे : श्यामानन्द ठाकुर 6 years ago भबिस्य के प्रश्न …. बहु हमारी बोली एक दिन क्या है मेरा नाता । प्रथम
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट शायद इंतज़ार ख़त्म, भिगोता सावन : वीना श्रीवास्तव 6 years ago शायद इंतज़ार ख़त्म छिड़ गई थी जंग केसर और चिनारों के बीच चिनारों ने रौंद
biratnagar कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट “मनुष्यता को कर स्वीकार” तथा “चुटकी भर सिंदुर” : निशा अग्रवाल 6 years ago मनुष्यता को कर स्वीकार निशा अग्रवाल आज रूद्र की भृकुटी में क्षणिक विलास आया है
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट तू हार नहीं,तू धीरज रख : अनिल कुमार मिश्र, 6 years ago तू हार नहीं,तू धीरज रख ******************** जीवन के झंझावातों में तूफानों में बरसातों में अपनों
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट –ओ सुशांत ! आखिर क्यों तुम कर गए हम सब के मन को अशांत : रीमा मिश्रा “नव्या” 6 years ago ओ सुशांत! जोड़ा था तुमने सबसे पहले “पवित्र रिश्ता” ज़ी.टीवी” के माध्यम से हम दर्शकों
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट मुझे भुलाना मत यारों, मैं भबिस्य तुम्हारा हूँ : एस एन ठाकुर 6 years ago मैं कौन हूँ……. मैं अपने देश में द्वितिय हूँ। फिर भी मैं अद्वितीय हूँ ।।
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट लाल हथेलियां लाल लाल चुड़ियां लाल जोड़े में सजी बाबूल की गुडिया : निशा अग्रवाल 6 years ago वीर वधू लाल हथेलियां लाल लाल चुड़ियां लाल जोड़े में सजी बाबूल की गुडिया लाल