कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट होती नहीं मुराद पूरी, गम को गले लगाना ही आदत महसूस सी होती : लालिमा 5 years ago आंख मिचौली ************ कलम से नहीं हूं मैं तो कोई कवि फिर भी
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट मौसम ने भेजी, आज एक सौगात : किशोर कुमार धनावत 5 years ago मौसम ने भेजी, आज एक सौगात| सुबह से हो रही, झमाझम बरसात| टपकती बूंदों में,
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट जय जवान : सुरन्जीत गाइन 5 years ago जय जवान जय जवान जय जवान। जय जय भारतीय जवान।। मृत्यु जितने वाला महा मर्दान;
janakpur कविता नेपाल साहित्य हिमालिनी अपडेट मैंने वि.पी. को देखा है : अजय कुमार 5 years ago उदारवादी जनप्रेमी दूरदर्शी समाजवादी चिंतक तथा नेपाली राजनीति के ऐतिहासिक महापुरुष आदरणीय विश्वेश्वरप्रसाद कोइराला के
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट जीवन-सार : किशोर कुमार धनावत 5 years ago शीर्षक:-“जीवन-सार” जीवन एक जलता चिराग है, खुद को झुलसाना पड़ता है| खुबसुरती नजरों में होती
biratnagar कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट जीते जी नही छूटता कभी, मोह माया का जाल : मनीषा मारु 5 years ago जीते जी नही छूटता कभी, मोह माया का जाल सारा काम निपटा,जब थक कर सोई
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट कैसे जन्मदिन मनाऊँ मैं, जब बेबसी हो फ़िज़ाओं में : स्मृति श्रीवास्तव 5 years ago कैसे जन्मदिन मनाऊँ मैं, जब बेबसी हो फ़िज़ाओं में, सिसकियाँ हो घटाओं में, वक़्त जैसे
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट हिमालिनी विशेष जिस तरह आती है चुपके से कविता और मृत्यु अकेले में : विनय सौरभ 5 years ago हिन्दी के सुप्रसिद्ध संवेदनशील कवि विनय सौरभ की कविताएँ १ किसी दिन मैं आऊँगा चुपके
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट मुझे प्यार हो गया, पूछो किससे ? : करुणा श्री 5 years ago परिवर्तन : करुणा श्री मुझे प्यार हो गया, पूछो किससे? बारिश में बेबाक उछलती जमुना
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट माफ़ करूँ उन्हें कैसे, जो औरों की जलती रूह पे अपना हाथ सेंकते : करुणा श्री 5 years ago शमशान माफ़ करूँ उन्हें कैसे जो औरों की जलती रूह पे अपना हाथ सेंकते अपने
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट अहिंसा परमो धर्म : हर प्राणी का स्वर गाये : कमला जैन 5 years ago 5,जून ,2021,शनिवार। पर्यावरण सुरक्षा दिवस पर। 1,ममकार,एवं इच्छाओं का करें विलीनीकरण, आत्मसात, समझें सब जीवों
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट हिमालिनी विशेष ना बिखरे जिंदगी का रैन बसेरा कहीं, बस नई सुबह की इंतजारी में है सभी : लालिमा घोष 5 years ago हाहाकार **** मानवता का यह हाहाकार असहनीय प्रतीत समय काल है टूट रहा मन सबका
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट जगह-जगह पर पेड़ लगाएं, आओ पर्यावरण बचाएं : श्याम सुन्दर श्रीवास्तव ‘कोमल’ 5 years ago 05 जून विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष….आओ पर्यावरण बचाएं जगह-जगह पर पेड़ लगाएं । आओ
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट अंतर्मन के अंतर्द्वंद से कब विजय पाऊँगी ? : दीक्षा मिश्रा 5 years ago मैं मन की कुछ बातों को मन में रख कर , अंदर के उथल- पुथल
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट अपने (कविता) : अनिल कुमार मिश्र 5 years ago अपने ***** जीना तो अपनों ने सिखाया था बार-बार अहसास कराया था ‘हम अपने हैं
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट सब मन में काली सोच छिपी है गली गली में लाश बिछी है। – अनिल कुमार मिश्र 5 years ago रिश्तों की तलाश ************** रिश्तों की व्यर्थ तलाश छिपी है गली गली में लाश बिछी
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट घर से निकलूं तो : (कविताएं) केशव शरण 5 years ago घर से निकलूं तो _______________ घर से निकलूं तो नर्सरी से पौधे लाऊं घर से
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट दुर्दिन से भी जीतेंगे साथ समय के ढाले हैं : गौरीशंकर वैश्य विनम्र 5 years ago उजाले मन में छिपे उजाले हैं। तम के मुखड़े काले हैं। कौन भला सच बोलेगा
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट आज मन बड़ा व्याकुल है, कल के चक्कर में आज आकुल हैं : अंकुर सिंह 5 years ago हाय रे कोरोना ! आज मन बड़ा व्याकुल है, कल के चक्कर में आज आकुल
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट ‘शब्द’भी’शब्द’ होना नहीं चाहते अक्षर..रहकर ही समाप्त हो जाने को आतुर हैं : अनिल कुमार मिश्र 5 years ago शब्द शायद थक गये हैं शब्द जो अक्षरों की भावनाओं में बहकर शब्द बन गये
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट हाल क्या है ?? : कवि दिनेश सिंह सेंगर 5 years ago हाल क्या है?? ************* हाल क्या है?? न पूछो सनम कल जो थे आज वो
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट हिमालिनी विशेष पा सकूं कुछ पल सुकून के तेरी आँचल की छाया में, माँ बस तेरा आँचल चाहता हूँ : बसंत चौधरी 5 years ago मातृ दिवस विशेष माँ माँ ! जिन्दगी की भाग–दौड़ में किस मुकाम पर आ गया
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट सृष्टि मां से, मां ही सृष्टि, मां सृष्टि का विस्तार है . 5 years ago स्नेह की रात तुम्ही ने बताई है मां तुम ही मेरी जीवनदाता, रक्षाकर्ता साक्षात भगवती
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट बस इतना सा ख़्वाब है मेरा विश्राम से पहले : वसन्त लोहनी 5 years ago ख़्वाब मुल्क की मिट्टी से निकला उसी के श्वास प्रश्वास से जिया मिट्टी में खेलते खेलते
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट एफआईएमटी कॉलेज द्वारा ऑनलाइन कविता प्रतियोगिता, राज्यवर्धन को प्रथम स्थान मिला 5 years ago शनिवार, 1 मई, 2021: एफआईएमटी कॉलेज के अंग्रेजी विभाग द्वारा ऑनलाइन कविता प्रतियोगिता का सफल
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट बीस से बढ़कर क्यों इक्कीस : मंजू उपाध्याय 5 years ago बीस से बढ़कर क्यों इक्कीस बीस से बढ़कर क्यों इक्कीस , कुछ तो कृपा करो
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट हे दायानिधि ! कहां गया तेरा वो उच्च विचार, कहाँ है तेरा वो सुदर्शन ? : अंशु झा 5 years ago हे ईश्वर ! तुझसे है शिकायत : अंशु झा ईश्वर से शिकायत हे ईश्वर !
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट आंधी भी ये थमेगी ज़ुरूर, कुछ टूट जाएंगे विश्वास कुछ के अब टूटेंगे गुरूर : डॉ सुनीलजी गर्ग 5 years ago जैसे सांस का बन गया मीटर कोई आस का मीटर बना डालो हुए बावरे
biratnagar कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट ” कोरोना को जड़ से काटें ” : इन्दु तोदी 5 years ago ” कोरोना को जड़ से काटें “ क्यूँ खाना हार! क्यूँ होना निराश! रात हो
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट जीवन की जय होगी ! : गोलोक बिहारी राय 5 years ago एपिडेमिक, पेस्टिलेन्स या पेंडेमिक सब की सब क्षय होगी जीवन की जय होगी ! नए
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट हिमालिनी विशेष भारतीय राजनयिक अभय कुमार द्वारा रचित ‘पृथ्वी गीत’को 100 से अधिक मशहूर कवि, संगीतकार,अभिनेता ने आवाज दी, 5 years ago दुनियाभर में 22 अप्रैल को पृथ्वी दिवस के तौर पर मनाया जाता है। इस
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट दुलारी : वसन्त लोहनी 5 years ago दुलारी दुलारी हो आप शुरू से अंत तक जब आप हंसती हो खिलखिलाहट उभरती है
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट हिमालिनी विशेष तुम अपने रँग में रँग लो तो होली है : हरिवंशराय बच्चन 5 years ago होली पर लिखी बेहतरीन कविताएँ होली हर्ष और उल्लास का पर्व है। इस दिन लोग
biratnagar कविता नारी साहित्य हिमालिनी अपडेट अंतर्मन का स्नेह गुलाल : मनीषा मारू 5 years ago अंतर्मन का स्नेह गुलाल यादों के समंदर में, रंगो की लहरें हैं उठती। पांव रख
siraha-lahan कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट आयो जी आयो फागणियो : कमला जैन 5 years ago आयो जी आयो जी आयो, आयो रंगीलो फागणियो,फागणियो प्यारो 2। 1, हरया,गुलाबी लाल केशरिया,हाँ लाल
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट कविता कोई लिख ही नहीं सकता…लिखवाई जाती है : मीना कुमारी ‘विश्व कविता दिवस’ 5 years ago विश्व कविता दिवस 21 मार्च 2021 मीना कुमारी । कविता कैसे लिखते हैं? अच्छी कविता
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट कस्ती को तो डूबना ही था : वसन्त लोहनी 5 years ago कस्ती को तो डूबना ही था जब वह तुफान वनी खुद संभल न सके तुम
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट निरुत्तर सीता : डॉ रजनी दुर्गेश 5 years ago निरुत्तर सीता धरा पुत्री सीता सुनयना सुता सीता छोड़ गयी हमें रीता। क्यों निरूत्तर रही
कविता हिमालिनी पत्रिका तेरे गीत -इरा ठाकुर 5 years ago इरा ठाकुर सपने में आभास सा हुआ कि कहीं मैं तुम्हें खोने तो नहीं लगी
कविता हिमालिनी अपडेट इबादत 5 years ago बिशन सागर तुम्हारी यादों की शमा को अपने अश्कों से बुझा तो दिया है मैंने
कविता हिमालिनी पत्रिका वसंत : नंदा पांडेय 5 years ago नंदा पाण्डेय इस वसंत कुछ ऐसा हो वसंत के उन्माद में भावना के विहग में
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट हिमालिनी विशेष अजन्मा, अविनाशी ,अशरीरी है शिव हम सबका पालक परमात्मा है शिव : श्रीगोपाल नारसन 5 years ago अजन्मा, अविनाशी ,अशरीरी है शिव हम सबका पालक परमात्मा है शिव खुशी,सुख,प्रेम ,आंनद वह देता
कविता नारी साहित्य हिमालिनी अपडेट अब जीना है तुझको नवयुग में संचारित हो यह शक्ति तुझ में : लालिमा घोष 5 years ago नवयुग की नारी लालिमा घोष अब जीना है तुझको नवयुग में संचारित हो यह शक्ति
कविता नारी साहित्य हिमालिनी अपडेट हिमालिनी विशेष शक्ति हूँ, सौन्दर्य हूँ, हुँकार हूँ, संहार हूँ, नीर भी हूँ, नेह भी, वजूद भी, विश्वास भी, हाँ मैं नारी हूँ : श्वेता दीप्ति 5 years ago डॉ.श्वेता दीप्ति हाँ मैं नारी हूँ वामा हूँ, जाया हूँ औरत हूँ , प्रमदा हूँ
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट *मैं और मेरी परछाईं* : मंजू उपाध्याय 5 years ago *मैं और मेरी परछाईं* एक दिन मैं,एक कोने में बैठी, अपने आप से बातें कर
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट जागो बहिनों!आलस तजकर- आगे कदम बढ़ाना है : कमला भन्साली जैन 5 years ago “अन्तर राष्ट्रीय नारी दिवस पर कविता” जागो बहिनों!आलस तजकर, आगे कदम बढ़ाना है। ‘नारी शक्ति’के
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट राम ही राम मेरा उपक्रम : गोलोक विहारी राय 5 years ago *राम ही राम मेरा उपक्रम* सीधा सा मेरूदंड हूँ अगरबत्ती की गंध हूँ मैं अभय
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट भला क्या कर लोगे : डॉ. शैलेश शुक्ला 5 years ago है हर ओर भ्रष्टाचार, भला क्या कर लोगे तुम कुछ ईमानदार, भला क्या कर लोगे ? दूध
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट कभी पूछा नहीं जाता है : बसन्त लोहनी 5 years ago कभी पूछा नहीं जाता है आप पूछती रहती हैं लेकिन मैं कैसे कहूं उन बातों
कविता साहित्य माँ!तेरा स्नेह मिले प्रतिपल जीवन को आलोकित कर दो मानव सच्चा बन पाऊँ मैं नेह-नीड़ में रस भर दो। 5 years ago माँ **अनिल कुमार मिश्र माँ!तेरा स्नेह मिले प्रतिपल जीवन को आलोकित कर दो मानव सच्चा
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट जीवन के हर मोड़ पर, तू बनी ममता का साया : अनीता मिश्रा “सिद्धि” 5 years ago ममता का साया भावों के सुमन कैसे मैं अर्पण कंरू , आँखे खोली तुझको देखा
कविता व्यक्तित्व और कृतित्व साहित्य हिमालिनी अपडेट हिमालिनी विशेष युवा मन के कवि डॉ. कुमार विश्वास के जन्मदिन पर पढें उनकी कविताएँ : शायरी को नज़र नहीं मिलती मुझको तू ही अगर नहीं मिलती 5 years ago मैं तो झोंका हूँ हवाओं का उड़ा ले जाऊँगा जागती रहना, तुझे तुझसे चुरा ले
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट एक ही परमात्मा है और कहीं न जाएँ : डा.केवलकृष्ण पाठक 5 years ago हम जाग जाएँ जागने का वक्त है हम जाग जाएँ यूँ ही अपनी जिन्दगी को
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट खमोशी अपनेपन का एहसास करवाती हैं : अमित डोगरा 5 years ago खमोशी खामोशी बहुत कुछ कहती है खामोशी दिल की मोहब्बत बयान करती हैं। खमोशी अपनेपन
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट जो वक़्त है, वही तो उम्र है : गोलोक विहारी राय 5 years ago झाँकती है सफेदी बालों से छुपाने लगा हूँ उन्हें काली मेंहदी से धुँधलाने लगे हैं
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट डोगरी इक भाषा ई नईं – इक मान ते सम्मान एै : वीरेन्द्र कुमार मन्सोतरा 5 years ago डोगरी सच्चें मुच्चे गैह तुस मीगी – बसारा करदे ओ सोचॉं पता नई मेरे बिना
biratnagar कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट प्रेम में तेरे हाँ प्रेम में तेरे : निशा अग्रवाल 5 years ago प्रेम में तेरे विकल प्राण हैं, मन है प्यासा अधर सुधामृत बस एक आशा बरसे
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट नजर झुकाये बेटियाँ : प्रियंका सौरभ 5 years ago नजर झुकाये बेटियाँ ●●● कभी बने है छाँव तो, कभी बने हैं धूप ! सौरभ
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट शर्तें और तजुर्बे : वसन्त लोहनी 5 years ago शर्तें और तजुर्बे अरे दोस्त ! जिंदगी सिर्फ जिंदगी है क्या सुबह, क्या शाम क्या
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट उस स्वर्ग को यहीं उतारा जाय : अलका ‘सोनी’ 5 years ago * अनुसंधान ** नित्य नये अनुसंधानों ने मिटा डाली हैं दूरियां नक्षत्रों की, सिमटा दिया
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट अब न मधेसी खून बहना, अपनी चौक चौराहों पर : अजयकुमार झा 5 years ago सावधान युवाओं! अब न मधेसी खून बहना, अपनी चौक चौराहों पर। घर घर मे गद्दार
कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट हिमालिनी विशेष दिल में तो है बस इस बात का गौरव, शान है बरकरार अपनी मातृभाषा पर : लालिमा 5 years ago १ बस थोड़ा इंतजार _____ तलाश है एक अच्छे समय की शुभ मुहूर्त का है
janakpur कविता साहित्य हिमालिनी अपडेट मैं मिथिला का वो बेटा हूं, जिसे हिंदी से है यारी : अजयकुमार झा 5 years ago प्यारी हिंदी * मैं मिथिला का वो बेटा हूं, जिसे हिंदी से है यारी। मैं