Tue. May 12th, 2026

कविता

लाज तिरंगें की रहे, बस इतना अरमान । मरते दम तक मैं रखूँ, दिल में हिन्दुस्तान :सत्यवान ‘सौरभ’

 

दो-दो हिन्दुस्तान सत्यवान ‘सौरभ’,  ●●● लाज तिरंगें की रहे, बस इतना अरमान । मरते दम तक

मुक्ति का अब प्रण लेकर के, शक्ति से जग में जीना सीखा : प्रियांशी

 

  हे मोहन ———— ——प्रियांशी हे मोहन मनहर मुरलीधर यमुना तट बांसुरी बजैया हे नंदलाल

सुन न सके हम किसी जुबां से, वजह बड़ी है शायद कोई : ममता शर्मा “अंचल”

 

पढें राजस्थान की जमीन से जुडी संवेदनाओं से भरपूर कवयित्री ममता शर्मा “अंचल” की कुछ

राष्ट्रीय स्तर की अग्रराखी लेख प्रतियोगिता सुसंपन्न

 

रक्षाबंधन के सुअवसर पर 28 अगस्त को नेपाल अग्रवाल महिला संगठन त. स. द्वारा राष्ट्रीय

बंधन नही अभिनन्दन है पवित्र पर्व रक्षाबंधन है : श्रीगोपाल नारसन

 

बंधन नही अभिनन्दन है पवित्र पर्व रक्षाबंधन है भाई बहन का प्रेम अमर खुशियों भरा