भारतीय राजनीति के दादा
हिमालिनी डेस्क सन् १९६९, जब प्रणब मुखर्जी पहली बार राज्यसभा सदस्य बने तो संयोग से

हिमालिनी डेस्क सन् १९६९, जब प्रणब मुखर्जी पहली बार राज्यसभा सदस्य बने तो संयोग से
उज्ज्वलकुमार झा काठमांडू। नेपाल में हाल ही नेपाल-भारत हस्तकला पर््रदर्शनी समाप्त हर्ुइ है । वी.पी
नेपाल भ्रमण कर रहे विभिन्न दल के भारतीय नेताओं ने २७ मई के अंदर ही
नक्सलवाद की चर्चा करते हुए केंद्रीय गृह सचिव आरके सिंह ने कहा है कि जिस
गणतन्त्र दिवस पर कार्यक्रम भारत के ६३वें गणतन्त्र दिवस के अवसर पर काठमांडू में भारत
पांच दिनों के भारत भ्रमण से लौटने के बाद उपप्रधानमंत्री तथा गृहमंत्री विजय कुमार गच्छेदार
भारतीय वित्तमन्त्री प्रणव मुखर्जी ने कहा है कि नेपाल की शान्ति प्रक्रियाको तार्किक निष्कर्षमें पहुँचाने
कौन बनेगा करोडपति में पाँच करोड की राशि जीतने वाले सुशील कुमार को मोतिहारी में
इस पूंजीवादी व्यवस्था का नियामक इस देश का पूंजीपति वर्ग है। सत्ता उसकी सेवा
नेपाल के लिए नए भारतीय राजदूत जयन्त प्रसाद ने अपना कार्यभार संभाल लिया है।
वैसे तो आतंकवाद ने पूरे विश्व पर अपना कब्जा जमाया है, फिर भी भारत कई
दो मुहिम, मकसद एक । जनमानस को उद्वेलित करने वाला पहला आंदोलन गांधीवादी अन्ना हजारे के
शासक वर्ग में जनता व राष्ट्र के प्रति र्समर्पण तथा काम करने की इच्छाशक्ति हो
पश्चिम बंगाल की आबोहवा बदल गई है । लाल की लाली फीकी पड गई है । बर्तमान
मैत्री सम्बन्ध चाहे दो व्यक्तियों के बीच हो या फिर दो देशों के बीच, वह
सन् १९७७ में वाममोर्चा द्वारा संसदीय निर्वाचन से पश्चिम बंगाल के सत्ता पर आधिपत्य जमाने
रामाशीष
भारतीय विदेश मंत्री एस.एम. कृष्णा के नेपाल भ्रमण के बार में लगाए जा रहे राजनीतिक
हिमालिनी डेक्स भारत नेपाल आर्थिक सहयोग के द्वारा इस समय नेपाल के विभिन्न जिलों में
सियाराम पांडेय ँशांत’ चीन भारत के लिए खतरे का सबब बना हुआ है । नेपाल,