Mon. Feb 24th, 2020

साहित्य

कबिता

ये फूल हमारे उपवन के :-वीरेन्द्रप्रसाद मिश्र बच्चे हैं नटखट भी होंगे कुछ पाने को

 

कबिता

मदहोश मौसम :-भीमनारायण श्रेष्ठ श्वेत शुभ्र उत्तुङ्ग हिमशिखरों में हरे-भरे पर्वतों की वादियों में विविध

 

शुभकामना

आ“सू और प्रश्न: आँखों की ग्रन्थियों से बहते हैं आँसू निकल कर साफ करते है

 

हसिकाएं

चोर -बंदूक तानते हुए)- जिंदगी चाहते हो तो अपना पर्स मेरे हवाले कर दो। व्यक्ति-

 

कबिता

एक प्रश्न- किस का बुद्ध, कैसा बुद्ध – वीरेन्द्र प्रसाद मिश्र तुमने तो सिर्द्धार्थ दिया

 

काबिता

नया काठमाण्डू गंदगी ढेर काठमाण्डू लोड सेडिंग का पेलम पेल काठमाण्डू पानी नहीं, बिजली नहीं

 

मा

मनीष कुमार श्रीवास्तव माँ एक एहसास एक सुखद मिठास र् कई बार सुना था, माँ