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साहित्य

अंतरास्ट्रीय जगत में हिंदी का बढ़ता आकाश : मुरली मनोहर तिवारी (सीपू)

 

मुरली मनोहर तिवारी (सीपू), बीरगंज, १० जनवरी,२०१८ | निस्सन्देह हिन्दी आज सारे विश्व में ‘अंतर्राष्ट्रीय

नेपाल की राम कथा : भानुभक्त कृत रामायण

 

हिमालिनी, अंक डिसेम्वर 2018,नेपाल के राष्ट्रीय अभिलेखागार में वाल्मीकि रामायण की दो प्राचीन पांडुलिपियाँ सुरक्षित

व्यापारी घराने का साहित्यिक चिराग ‘बसन्त चौधरी’ : रमण घिमिरे

 

हिमालिनी, दिसम्बर अंक २०१८ में प्रकाशित | विनम्र स्वभाव, भावुक मन और व्यवहार कवि बसन्त

शतायु कविवर घिमिरेः एक शब्दचित्र : डा. तुलसी भट्टराई

 

  यहाँ पर उनके ही शब्दों द्वारा अभिनन्दन किया जायः गाउँछ गीत नेपाली ज्योतिको पंख

नेपाली भाषा के आदिकवि भानुभक्त आचार्य : प्रियम्बदा काफ्ले

 

हिमालिनी, अंक डिसेम्वर 2018,नेपाली काव्य जगत् में भानुभक्त आचार्य को आदिकवि के रूप में जाना

मेरठ लिटरेरी फेस्टिवल में श्री बसंत चौधरी की पुस्तक ‘चाहतों के साये में’ का विमोचन का दृष्य, फोटो फीचर सहित

 

मेरठ लिटरेरी फेस्टिवल २०१८ , 10 दिसंबर को प्रातः उद्घाटन सत्र का शुभारम्भ सरस्वती वंदना

प्रत्येक साहित्यकार अपने देश के अतीत से प्राप्त विरासत पर गर्व करता है : श्वेता दीप्ति

 

साहित्यसङ्गीतकलाविहीनः साक्षात्पशुः पुच्छविषाणहीनः हिमालिनी, अंक डिसेम्वर 2018, (सम्पादकीय ) भर्तृहरि नीतिशतक में कहा गया है

ताउम्र का साथ मिलता कहाँ है ख्वाहिश तुम्ही हो मेरी जिंदगी के : श्वेता दीप्ति, मुशायरा मेरठ में

 

१० डिसेम्बर २०१८ | मेरठ लिटरेरी फेस्टिवल के पहले दिन सांध्यकालीन मुशायरा का आयोजन किया

हिन्दुस्तानी भाषा अकादमी द्वारा नेपाली अनुदित पुस्तक का लोकार्पण

 

  नई दिल्ली 8/12/18 दिल्ली इंदिरागांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सभागार में पुस्तक लोकार्पण कार्यक्रम

काठमांडू में भारतीय साहित्यकारों का सम्मान एवं नेपाल–भारत काव्य संध्या

 

शा्निवार दिनांक २४ नवम्बर की संध्या में नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान एवं हिमालिनी हिन्दी मासिक पत्रिका

वरिष्ठ हास्य कलाकार श्रेष्ठ और आचार्य ‘जनांदोलन स्वर्ण पदक’ से सम्मानित

 

हिमालिनी डेस्क काठमाडू, ११ नोवेम्बर । वरिष्ठ हास्य कलाकार मदनकृष्ण श्रेष्ठ और हरिवंश आचार्य को

नेपाल में उर्दू की शमा : मोहम्मद, मुस्तफा कुरेशी ‘अहसन’

 

मोहम्मद, मुस्तफा कुरेशी ‘अहसन’, हिमलिनी अंक अक्टूबर 2018 । हमारा मुल्क नेपाल पूरी दुनिया में वो

नेपाल सुरक्षित है तो हिन्दुस्तान सुरक्षित है : डा. विजय पण्डित

 

  सन्दर्भ : नेपाल भारत साहित्यिक सम्मेलन 2018 हिमालिनी अंक सितम्बर २०१८ पिछले २० साल से

शर्मा को ‘पद्यश्री साधना सम्मान’ और पाण्डे को ‘पद्यश्री साहित्य पुरस्कार’ प्रदान

 

हिमालिनी डेस्क काठमांडू, २५ अक्टूवर । नेपाली साहित्य के विकास और विस्तार में उल्लेखनीय योगदान

नेपाली साहित्य को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर में पहुंचाने का अवसर : रवीन्द्र आशीश शैली

 

सन्दर्भ : नेपाल भारत साहित्यिक सम्मेलन 2018 हिमालिनी अंक सितम्बर २०१८ नेपाल–भारत मैत्री संबंध का एक

साहित्यिक तथा सांस्कृतिक सम्बन्ध को मजबूत किया है : गणेश लाठ

 

सन्दर्भ : नेपाल भारत साहित्यिक सम्मेलन 2018 हिमालिनी अंक सितम्बर २०१८ ‘नेपाल भारत साहित्य महोत्सव’, यह

नेपाली भाषा और साहित्य के लिए महत्वपूर्ण अवसर : लक्ष्मण गाम्नागे

 

सन्दर्भ : नेपाल भारत साहित्यिक सम्मेलन 2018 हिमालिनी अंक सितम्बर २०१८ नेपाल और भारत दोनों देशों

मेरी चाहत है, अगली बार नेपाली में ही कविता पढूं : डा. मधु प्रधान

 

सन्दर्भ : नेपाल भारत साहित्यिक सम्मेलन 2018 हिमालिनी अंक सितम्बर २०१८ नेपाल आने का अचानक प्रोग्राम

दूरियां ये दिलों की मिटाती हुई ! कुछ हंसाती हुई कुछ रुलाती हुई : सविता वर्मा “ग़ज़ल

 

चिट्ठियां चिठ्ठियां प्यारी सी चिट्ठियां ! प्रीत के रंग में ये रंगी चिट्ठियां…. रखती दिल

वीरगंज ने पुराने कथन को ब्रेक किया है :सनत रेग्मी

 

सन्दर्भ : नेपाल भारत साहित्यिक सम्मेलन 2018 हिमालिनी अंक सितम्बर २०१८औद्योगिक नगरी वीरगंज को नेपाल–भारत

विभिन्न देशों के दर्जनों साहित्यकार द्वारा रचित कविता संग्रह ‘हिन्दी की विश्व यात्रा’ लोकार्पण

 

काठमांडू, ५ सितम्बर । विभिन्न देशों के ४ दर्जन साहित्यकारों की संयुक्त कविता संग्रह ‘हिन्दी

” ना मैं, ना अर्जुन; धरा का, सर्वश्रेष्ठ योद्धा; तो, तू ही है; हाँ  ! तू है, अभिमन्यु ।”

 

अभिमन्यु; गंगेश मिश्र कर्ण रोया था ! उसकी, मृत्यु पर; स्तब्ध था ! दुर्योधन के,

यकीं का यूँ बारबां टूटना (ग़ज़ल) : डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’

 

यकीं का यूँ बारबां टूटना आबो-हवा ख़राब है मरसिम निभाता रहूँगा यही मिरा जवाब है मुनाफ़िक़ों की भीड़ में कुछ नया न मिलेगा ग़ैरतमन्दों में नाम गिना जाए यही ख़्वाब है दफ़्तरों की खाक छानी बाज़ारों में लुटा पिटा रिवायतों में फँसा ज़िंदगी का यही हिसाब है हार कर जुदा, जीत कर भी कोई तड़पता रहा नुमाइशी हाथों से फूट गया झूँठ का हबाब है धड़कता है दिल सोच के हँस लेता हूँ कई बार  तब्दील हो गया शहर मुर्दों में जीना अज़ाब है ये लहू, ये जख़्म, ये आह, फिर चीखो-मातम तू हुआ न मिरा पल भर इंसानियत सराब है  फ़िकरों की सहूलियत में आदमियत तबाह हुई  पता हुआ ‘राहत’ जहाँ का यही लुब्बे-लुबाब है