Sat. Sep 12th, 2026

बिचार

लेन-दखलअंदाजी में बालेन और भविष्यद्रष्टा बुद्धछिरिङ : सी.एन. थारू, आर.के. तामाङ

 

सी.एन. थारू, आर.के. तामाङ, काठमांडू, 12 सितंबर । वर्तमान सरकार और जनजीविका के सवाल वर्तमान

वर्तमान दौर की सबसे बड़ी महामारी – संस्कारहीन रिश्ते : कृति जैन

 

रिश्तों को बड़े शब्द नहीं, छोटे संस्कार बचाते हैं एक साथ रहते हुए भी कितने अकेले

विनाशकारी आपदा : ईश्वरीय प्रहार या प्रकृति के साथ खिलवाड़ का परिणाम? : राघवेन्द्र साह

 

राघवेन्द्र साह, जनकपुरधाम, २९ अगस्त। नेपाल में हाल के वर्षों में दिखाई दे रही विनाशकारी

इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं – व्यवहार और संस्कार ही मनुष्य की असली पहचान : बिमल सरार्फ

 

बिमल सरार्फ, रक्सौल,12 अगस्त 2026 । जीवन केवल सुख-सुविधाओं का नाम नहीं है, बल्कि यह हमारे

बालेन की आधी रात की पोस्ट: क्या सत्ता के भीतर बढ़ रही है बेचैनी ?: श्वेता दीप्ति

 

काठमाडौँ। राजनीति में शब्दों का महत्व केवल उनके अर्थ में नहीं, बल्कि उनके समय और

समावेशीविहीन लोकतंत्र: दिवास्वप्न और मृगतृष्णा के ३५ वर्ष : डा. विधुप्रकाश कायस्थ

 

डा. विधुप्रकाश कायस्थ, काठमांडू, 6 अगस्त। लोकतंत्र के ३५ वर्ष और गणतंत्र के १८ वर्ष

धार्मिक शहादत के बल पर *हिन्दुराष्ट्र से हिन्दुराष्ट्र तक* एक वस्तुनिष्ट विश्लेषण : डा.विजय दत्त

 

डा.विजय दत्त, काठमांडू। 3 अगस्त।  *अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्।* *उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्॥*

अपनेपन का दिखावा और कपटपूर्ण धोखा : आखिर आज लोग ऐसा क्यों करते हैं? बिमल सर्राफ

 

बिमल सर्राफ, रक्सौल, पूर्वी चंपारण । मानव जीवन का सबसे सुंदर आधार विश्वास, अपनापन और

असफलता की ओर उन्मुख GenZ की सरकार- हनीमून पीरियड मेही मधुमेह की चपेट में

 

​डा. विजय दत्त, काठमांडू 29 जुलाई। रूढ़िवादियों की अहंकारी, भ्रष्टाचारी, गैर-जिम्मेदाराना और आपसी समझ की कमी

खुशियों के लिए किसी का इंतजार क्यों? अपने जीवन के शिल्पकार आप स्वयं हैं : बिमल सर्राफ

 

बिमल सर्राफ, रक्सौल / पूर्वी चंपारण । “आप कितने ही निपुण, बुद्धिमान, विवेकशील, गुणवान और

वेस्टमिंस्टर मॉडल: लोकतन्त्र के नाम पर एक धोखा : डॉ.विधुप्रकाश कायस्थ

 

डॉ. विधुप्रकाश कायस्थ, काठमांडू। जब दक्षिण एशिया में लोकतन्त्र की बात होती है, तो सबसे ज़्यादा

नेपाल और भारत के बीच बहुआयामी संबंध- एक संयुक्त विरासत : ​डा.विजय दत्त

 

​डा. विजय दत्त, 19 जुलाई। *​ॐ जम्बूद्वीपे भारतवर्षे भरतखण्डे आर्यावर्तान्तर्गतब्रह्मावर्तैक नेपाल भारतदेशे गंगावाग्मति पुण्यक्षेत्रे…* प्राचीन

डिजिटल युग का जासूसी युद्ध : चीन की रणनीति, नेपाल की चुनौती और खुफिया व्यवस्था : अनिल तिवारी

 

अनिल तिवारी, 13 जुलाई। कभी युद्ध जीतने के लिए हजारों सैनिकों, शक्तिशाली हथियारों और विशाल

जहाँ शिव और बुद्ध मिलते हैं: काठमांडू घाटी की दिव्यता : डा.विधुप्रकाश कायस्थ

 

डा. विधुप्रकाश कायस्थ, काठमांडू । नेपाल का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक केंद्र, काठमांडू घाटी, धार्मिक रीति-रिवाजों

महिला सशक्तिकरण: प्रगतिशील और सफल समाज की आधारशिला : अधिवक्ता शिव गणेश कर्नाटी

 

  अधिवक्ता शिव गणेश कर्नाटी, किसी भी राष्ट्र की वास्तविक प्रगति का आकलन केवल उसकी आर्थिक

ब्रह्मपुत्र: जीवन और दिव्यता की नदी : डॉ. विधुप्रकाश कायस्थ

 

डॉ. विधुप्रकाश कायस्थ, काठमांडू, २ जून । असम समेत उत्तर-पूर्वी भारत की “लाइफलाइन” मानी जाने

हिमालयन लिटरेचर फेस्टिवल साहित्यिक आयोजन मात्र नहीं,अंतरराष्ट्रीय संवादस्थल है : श्रीजना भंडारी

 

काठमान्डू नेपाल की प्रतिष्ठित साहित्यकार, कवयित्री, सांस्कृतिक कर्मी और साहित्यिक आयोजक समकालीन नेपाली साहित्य और

प्रधानमंत्री के तेवर और नजरअंदाज करने की शैली से प्रश्नों का उठना लाजमी

 

काठमान्डू जनता ने बड़ी ही उम्मीद के साथ अपने लिए प्रधानमंत्री को चुना था ।

वरिष्ठता बनाम कार्यक्षमता : क्या हमारी नागरिक चेतना चयनात्मक है ?

 

(यहाँ धीरेंद्र प्रेमर्षि के फेसबुक स्टेटस का हिंदी अनुवाद प्रस्तुत है, जिसे हिंदी पाठकों और

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