Wed. Jun 26th, 2019

साहित्य

भूकम्प और सरकार ! आँसूओं की क़ीमत, कौड़ियों में, अधिकार, बेड़ियों में : गंगेश मिश्र

भूकम्प और सरकार… अनिश्चितता, भूकम्प और सरकार, दोनों की, समानांतर कायम रही। आँसूओं की क़ीमत,

वीपी कोइराला नेपाल भारत फाउन्डेशन द्वारा आयोजित कन्भेरसेशन में अमर न्योपाने द्वारा रचित ‘करोड़ों कस्तुरी’

 काठमाण्डू, चैत्र २९ गते । वीपी कोइराला नेपाल भारत फाउन्डेशन द्वारा आयोजित कन्भरसेशन में अमर

क्या ईश्वर है ?

क्या ईश्वर है ?महात्मा गाँधीएक ऐसी अव्यक्त, अपरिभाषित, रहस्यमयी शक्ति अवश्य है, जो विश्व के

धर्मेन्द्र विह्वल पार्वती स्मृति पुरस्कार से सम्मानित

  काठमान्डौ, १गते | काठमान्डौ शांतिनगर, प्रयागमार्ग अवस्थित राष्ट्रीय वहावी केन्द्र के सभागार में पार्वती

समझौता

समझौतागंगेश मिश्र, कपिलवस्तु२२,फरवरीसमझौते होते रहे हैं,होते रहेंगे।जिन्हें बोने हैं काँटेबोते रहेंगे।फिर वही होगा,जो होता रहा

जिन्दगी

शुवह शुहानी मौसम दिवानी ख़ुशहाल जिन्दगी सुन्दर कहानी पग पग सँभलना सँभलकर चलना खुशीयाँ बाटकर

हाय रे राष्ट्रवाद ! गागर मे भरी हुई जल की तरह जहां, तहां छलक जाती है : बिम्मीशर्मा

बिम्मीशर्मा, काठमांडू , २२,सेप्टेम्बर | हम नेपालवासियों के अन्दर राष्ट्रवाद कूट, कूट कर भरा है

जब भाग्य में अंधेरा, तो शहर किसके लिए था, जब धूप थी किस्मत तो सजर किसके लिए था|गुल्जारे अदब की गजल गोष्ठी

गुल्जारे अदब की मासिक गजल गोष्ठी नेपालगन्ज,(बाके) पवन जायसवाल,२०७२ असोज २ गते । गुल्जारे अदब

मैने देखा है

पलाष्टिकके गुलजस्तासे महक आते मैने देखा है कसाइभी अनाथो पर दया देखाते मैने देखा है

“मेरे दिलों के हौसलों को आजमाने के लियें” गुल्जारे अदब द्वारा गजल गोष्ठी,

नेपालगन्ज,(बाके) पवन जायसवाल, २०७२ जेष्ठ ३० गते । गुल्जारे अदब बाके ने नेपालगन्ज के महेन्द्र

ऐ मौत

ऐ मौत, तु इतना कठोर क्यो ? हजारो सपने, लाखो अरमान सजाए इन्सानको पलभरमे मिटा

नेपाली साहित्य समाज नेपाल च्याप्टर द्वारा ९ वाँ स्रष्टा भेटघाट कार्यक्रम

काठमाणडू,१७ जनबरी । अन्तर्राष्ट्रीय नेपाली साहित्य समाज नेपाल च्याप्टर द्वारा ९ वाँ स्रष्टा भेटघाट कार्यक्रम

कमिशनमांडू

मुकुन्द आचार्य:काठमांडू अपना नाम समय-समय पर बदलते रहता है । जैसे कुछ बनिया-बैताल सरकारी महसूल

काव्य और गजल क्षेत्र से जुड़ी शख्सियत द्वारा काठमाण्डू मे महफिले गजल

काठमाण्डू,१३ दिसम्बर । अन्तर्राष्ट्रीय नेपाली साहित्य परिषद के बैनर तले हर महीने के अन्तिम में