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साहित्य

अब भी करना छोड़दो पशुओं पर अत्याचार : कमला भंसाली जैन

 

“समय-सार” बने हम अभय-हिंसा के सेनानी, अपने से अपना कल्याण,प्रेषित हो जिन-वाणी। स्वयं-स्वयं का करे,अनुसंधान।

मातृ दिवस के अवसर पर काव्यकुल संस्थान द्वारा अंतरराष्ट्रीय डिजिटल काव्य समारोह

 

१० मई,२०२० | मातृ दिवस के अवसर पर काव्यकुल संस्थान(पंजी.) द्वारा अंतरराष्ट्रीय डिजिटल काव्य समारोह

नेपाल भारत मारवाड़ी भाषा ओनलाईन कविता सम्मेलन”का उद्घाटन मन्त्री दुगड़जी के हाथों

 

ऐतिहासिक “नेपाल भारत मारवाड़ी भाषा (ओनलाईन)  कविता सम्मेलन”  इन्दु तोदी, विराटनगर। 9 मई शनिवार  2020 

सिर्फ एक बच्चे को जन्म देना ही महिलाओं को माँ नही बनाता : अनिल कुमार मिश्र,’आञ्जनेय’

 

एक तपस्या है माँ बनना अनिल कुमार मिश्र,’आञ्जनेय’, हज़ारीबाग़ | ‘माँ’एक ऐसा शब्द है जिसके

साहित्यकार खेमलाल पोखरेल को मिला अन्तरराष्ट्रीय आर्डर आफ शेक्सपीयर मैडल

 

नेपाली भाषा,साहित्य,कला,संस्कृति के क्षेत्र में लम्बे समय से क्रियाशील  झापा दमक के खेमलाल पोखरेल ने

प्रेस आजादी का मतलब  सामाजिक नव निर्माण से है : श्वेता दीप्ति

 

डा.श्वेता दीप्ति, काठमांडू, ३ मई २०२० | अंतरराष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता दिवस हर साल तीन मई

मीडिया, बाजार ,हिन्दी जाति और हिन्दी भाषा

 

संजय कुमार सिंह हिन्दी पत्रकारिता का जन्म 19वीं शताब्दी में होता है, जब साम्राज्यवादी औपनिवेशिक

लॉक डाउन में बिंदास चल रहा है अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलन

 

परमशिला बनिया, मर्चवार, रूपंदेही, 5 नंबर प्रदेश | कोरोनावायरस की वैश्विक महामारी और महा शंकट

लाशों पर लाशें बिछी, गली–गली विरान गांव, शहर, कस्बे सभी, लगते आज वुहान : रामनिवास मानव

 

दोहे सन्दर्भ कोरोना डॉ. रामनिवास ‘मानव’ गली–मुहल्ले चुप सभी, घर–दरवाजे बंद कोरोना का भूत ही,

कविता महोत्सव के लिए प्रज्ञा प्रतिष्ठान द्वारा कविता पेश करने के लिए आह्वान

 

काठमांडू, २२ अप्रील । नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान ने कविता महोत्सव के लिए साहित्यकारों को कविता

बस प्रेम होना चाहती हूं,मुझे प्रिय है मेरा अकेला होना, मुझे प्रिय है तुम्हारा साथ अनंत : सरिता सारस

 

मैं गुलाम नहीं होना चाहती मैं गुलाम नहीं होना चाहती अपनी आदतों की अपने शौकों

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